द खबर एक्सप्रेस 08 अक्टूबर 2023। मानसून के महीनों में फाइलेरिया (filariasis) नामक ये बीमारी ज्यादा फैलती है। खासकर कि गांवों में और वहां जहां इस समय बाढ़ के हालात हैं या जलभराव है। यहां इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या ज्यादा होती है। लेकिन, सवाल ये है कि ये बीमारी होती कैसे हैं, पानी से इसका क्या लेना-देना है और इसका कारण क्या है? तो, आइए इन्हीं तमाम सवालों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
फाइलेरिया क्या है…?
फाइलेरिया, एक संक्रामक रोग है जो कि निमेटोड परजीवियों (Wuchereria bancrofti) की वजह से होता है। इससे शरीर में सूजन और बुखार हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में ये शरीर की बनावट बदल सकता है जैसे त्वचा का मोटा होना और पैरों में सूजन।
फाइलेरिया किसकी वजह से होता है..?
फाइलेरिया मच्छरों की प्रजाति के एक कीड़े (filarial worms) जो कि खून चूसते हैं, इनकी वजह से ये होता है। इसमें हमारा लसीका तंत्र या लिंफेटिक सिस्टम संक्रमित हो जाता है। लसीका तंत्र शरीर में फ्यूल्ड यानी द्रव पदार्थ के स्तर को संतुलित करता है और आपके शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। पर जब ये कीड़ा आपको काट लेता है ये लसीका तंत्र असंतुलित हो जाता है और फिर इसकी वजह से शरीर में सूजन आ जाती है।
फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया से पीड़ित हर तीन में से दो लोगों में गंभीर लक्षण होते हैं। क्योंकि इस बीमारी में सबसे पहले इम्यून सिस्टम प्रभावित हो जाती है और इसकी वजह से शरीर में तीन गंभीर बदलाव आते हैं। जैसे-
-सूजन, जो कि पैरों में व्यापक रूप से देख जा सकता है।
-लिम्फेडेमा, जिसमें आपके लसीका तंत्र में तरल पदार्थ का निर्माण होता है और ये सूजन और बुखार पैदा करता है।
-अंडकोश में सूजन और तरल पदार्थ का निर्माण।
-आपकी बाहों, पैरों, स्तनों और महिला जननांगों (योनि) में सूजन और तरल पदार्थ का निर्माण हो सकता है।
-सिर दर्द
-बुखार
फाइलेरिया से कैसे बचें
फाइलेरिया से बचने के लिए आपको मच्छरों से बचना होगा और इसके लिए आप मच्छरदानी लगाकर सोएं। घर के आस-पास पानी इक्ट्ठा न हो दें। कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा सफाई रखें ताकि आस-पास मच्छर और कीड़े इक्ट्ठा न हो। पेस्ट कंट्रोल करवाएं। शाम को नीम के पत्तों को जलाएं और फुल बाजू वाले कपड़े पहनें।












