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सुखद अहसास- श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल अब पहले जैसा नहीं रहा….

Published on: April 15, 2026

The Khabar Xpress 15 अप्रैल 2026, श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल जो कुछ समय पहले तक इलाज न होने एवं अन्य कई चिकित्सीय सुविधाएं न होने के लिये जाना जाता था वहां अब फिज़ा बदली बदली सी है। आमजन की शिकायत हरदम रहती थी कि ना कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ की सेवायें यहाँ है तो ना ही कोई क्रिटिकल स्थिति होने पर प्रसूताओं का इलाज ही सम्भव है। आम नागरिकों को या तो महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था या फिर बीकानेर भागना पड़ता था। लेकिन सुखद अहसास ये है कि अब ये परिस्थितियां बदल रही है और बदल रहा है आमजन के इस उपजिला अस्पताल के प्रति नजरिया भी। इसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है वर्तमान में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का भी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र गोदारा, ऑर्थो स्पेशलिस्ट डॉ जगदीश गोदारा और श्रीडूंगरगढ़ में पहली बार श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ वेदप्रकाश शर्मा या फिर शल्य क्रिया में बेहद जरूरी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ सुनील सहारण, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ श्यामसुंदर नागल एवं डॉ दिनेश पड़िहार और उपजिला अस्पताल के इंचार्ज डॉ ओपी स्वामी। इन सभी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाओं से श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल में आमजन के विश्वास को बनाया है। “उपजिला अस्पताल अब पहले जैसा नहीं रहा” ये ही कहना है आमजन का। फिर भी सुधार की गुंजाइश तो अभी भी है क्योंकि किसी भी दुर्घटना में घायल का प्राथमिक इलाज तो किया जा रहा परन्तु मेजर दुर्घटना के लिये अभी भी कोई सुविधा नही है। ये सुविधा तब तक हो भी नही सकती जबतक सर्व सुविधायुक्त ट्रॉमा सेंटर का निर्माण न हो।

लंबे समय बाद हुई सिजेरियन डिलेवरी

श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल में जहां कभी सामान्य डिलेवरी के लिए भी आमजन आने के लिए हिचकिचाते थे। कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ ना होने के कारण महिलायें अपना इलाज अन्य निजी अस्पतालों व बीकानेर करवाने के लिए मजबूर थी वहीं अब श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल में सिजेरियन डिलेवरी भी सम्भव हो पाई है। आज श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल में सुखद अहसास की खबर मिली कि लंबे समय बाद अस्पताल में सिजेरियन डिलेवरी करवाई गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र गोदारा ने बताया कि ऊपनी गांव की 20 वर्षीय प्रसूता के गर्भस्थ शिशु ने गर्भ में ही मेकोनियम (पहला मल) पास कर दिया था। यह स्थिति मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि मलीन एम्नियोटिक द्रव फेफड़ों में जाने से बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसे मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम (MAS) कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति आमतौर पर प्रसव के दौरान शिशु के तनाव में आने से उत्पन्न होती है और समय रहते सर्जरी नहीं की जाए तो जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए ऑपरेशन किया और सुरक्षित डिलीवरी करवाई।

इस सफल सर्जरी में डॉ. सुनील सहारण, डॉ. एस.एस. नांगल, डॉ. एस.के. बिहानी, डॉ. जगदीश गोदारा, डॉ. दिनेश पड़िहार सहित सहयोगी स्टाफ प्रदीप कुमार, गंगाराम, रेखा मीणा, गणेश, सीताराम और प्रमोद की अहम भूमिका रही। पीएमओ डॉ. ओमप्रकाश स्वामी ने इस सफल सर्जरी के लिए डॉ. रविन्द्र गोदारा सहित टीम को बधाई दी।

संकटमोचक बने है डॉ जगदीश

श्रीडूंगरगढ़ उपजिला अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ जगदीश गोदारा क्षेत्र में घुटने प्रत्यारोपण एवं हड्डी जोड़ सर्जन के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। डॉ जगदीश उन मरीजों के लिए संकटमोचक बन गए है तो वर्षों से घुटनों के दर्द से परेशान थे। घुटनों की शल्यक्रिया श्रीडूंगरगढ़ में असंभव सी बात थी। मरीजों को जयपुर, जोधपुर या अहमदाबाद जाकर घुटनो का ऑपरेशन करवाना पड़ता था। गरीबों के लिये ये दुष्कर कार्य था जिसे सरल बनाया डॉ जगदीश गोदारा ने। डॉ गोदारा अब तक कई मरीजों का सफल ऑपरेशन करके उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर चुके है।

अभी 7 अप्रैल को ही श्रीडूंगरगढ़ निवासी 60 वर्षीय गुलाब देवी शर्मा पत्नी श्री रिकताराम शर्मा के बाएं घुटने (Left Knee) का टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) सफलतापूर्वक किया गया। मरीज लंबे समय से घुटने के असहनीय दर्द से परेशान थीं। जिसके कारण चलने-फिरने तथा दैनिक कार्यों में काफी कठिनाई हो रही थी। विशेषज्ञ डॉ. जगदीश गोदारा द्वारा सफल सर्जरी कर मरीज को दर्द से राहत प्रदान की गई। ऑपरेशन के पश्चात मरीज की स्थिति स्थिर है तथा अब उन्हें चलने-फिरने में पहले से काफी सुधार महसूस हो रहा है।

इस सफल ऑपरेशन में एनेस्थेटिक विशेषज्ञ डॉ. सुनील सहारण का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। साथ ही नर्सिंग ऑफिसर प्रदीप पांडेय, रेखा सिस्टर एवं गणेश ने ऑपरेशन एवं पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल में सराहनीय भूमिका निभाई।

रिकताराम शर्मा ने सफल उपचार के लिए पूरी मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ने तो मन बना लिया था कि ऑपरेशन जयपुर या अहमदाबाद करवाया जाए। लेकिन डॉ गोदारा से मिलने एवं उनसे परामर्श के बाद उन्हें विश्वास हुआ कि यहां भी वैसा ही सफल ऑपरेशन हो सकता है जो दूसरे बड़े शहरों में होता है। डॉ गोदारा द्वारा किये गए ऑपरेशन के मरीजों से उनका अनुभव जानकर हमने उनको यही घुटने का ऑपरेशन करवाया जिसमे अब बहुत अधिक सुधार है।

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