The Khabar Xpress 23 जुलाई 2025। “दो मूसा, दो कातरा, दो तीड़ी, दो ताय।
दो की बादी जळ हरै, दो विश्वर दो वाय।”
तो उक्त पंक्तियों में नौतपा का रहस्य बताया गया है और यह भी बताया गया है की अगर नौतपा न तपे तो क्या होता है?
तो पंक्तियां बताती है की नौतपा के पहले दो दिन लू न चली तो चूहे बहुत हो जाएंगे। अगले दो दिन न चली तो कातरा (फसल को नुकसान पहुंचाने वाला कीट) बहुत हो जाएंगे। तीसरे दिन से दो दिन लू नही चली तो टिड्डियों के अंडे नष्ट नहीं होंगे। चौथे दिन से दो दिन नहीं तपा तो बुखार लाने वाले जीवाणु नहीं मरेंगे। इसके बाद दो दिन लू न चली तो विश्वर यानी सांप-बिच्छू नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे और आखिरी दो दिन भी नहीं चली तो आंधियां अधिक चलेंगी। फसलें चौपट कर देंगी।
नौतपा, जिसे “नौ दिनों की तपिश” भी कहा जाता है, वह समय है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, और इसके बाद के 9 दिन पृथ्वी पर अत्यधिक गर्मी लेकर आते हैं. इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और गर्मी चरम पर पहुंच जाती है.
इस वर्ष, नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहा था जब सूर्य ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया।
राजस्थान के बीकानेर सहित कई जिलों में खरीफ फसलों पर कातरे कीट का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे मूंग और मोठ जैसी दलहनी फसलें बर्बाद होने लगी हैं। क्षेत्र के कई गांवों में मूंग और मोठ की फसल में इसका प्रकोप लगातार देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खेत में लहलहाते फसल में कातरे के प्रकोप ने किसानों की बैचेनी बढ़ा दी है। अभी के मौसम में नमी और बादलों की उपस्थिति के चलते खरीफ की फसलों में कई तरह के कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बनी रहती है। वर्तमान मौसम में नमी और बादलों के चलते फसलों पर कातरा कीट का प्रकोप हो गया है। क्षेत्र के कई गांवों की फसलों को कातरे ने अपनी चपेट में ले लिया है। किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्र के गांव बिंझासर निवासी युवा किसान श्रवण सारस्वत ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के गांव के किसानों पर कातरे का कहर बढ़ है। क्षेत्र के गांव बिंझासर, गुसाईसर बड़ा, मानकरासर, समंदसर, राजपुरा, पूनरासर आदि गांव में भयंकर कातरा हुआ है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। हताश और परेशान किसान को राम के बाद अब राज का ही आसरा है। किसान ओमप्रकाश कड़वासरा ने बताया कि आबाद फसलों को बर्बाद करने पर तुला कातरा हम किसानों के पसीने को मिट्टी में मिला रहा है। राम हमसे रूठ गया है अब सिर्फ राज का ही सहारा है। क्षेत्र के किसानों लालचंद सारस्वत, गजानंद सारस्वत, भंवरलाल गोदारा, चंदू भूकर, नंदू भूकर, किशन लाल मोट, तोलूराम नायक, मदन लाल सारस्वत, बाबूलाल सारस्वत, आसाराम नैण ,मुनिराम सारस्वत ने कहा है कि अब श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत हमारी पुकार सुने और राज से हम किसानों की सहायता करवावे।

कृषि विशेषज्ञ डॉ कन्हैयालाल सारस्वत के अनुसार एक मादा कीट 600 से 700 अंडे देती है, जिनसे निकलने वाली लटें 50% तक फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मानसूनी बारिश के साथ ही कातरे की पतंगें जमीन से निकलने लगती हैं। इनको समय पर नष्ट नहीं किया जाए, तो फसलों में कातरे का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। सारस्वत ने बताया कि खेत के मेड़ों, चारागाहों और खाली जगहों पर रात में गैस लालटेन या बिजली का बल्ब जलाकर उसके नीचे पानी में मिट्टी का तेल मिलाकर रखें, ताकि प्रकाश से आकर्षित पतंगे इस पानी में गिरकर नष्ट हो जाए।
उपचार
डॉ कन्हैयालाल सारस्वत ने बताया कि फसल के आस-पास खाली जमीन या चारागाह में जहां पतंगे अंडे देती हैं, वहां क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत, 25 किलो डस्ट पाउडर प्रति हैक्टेयर में बुरकाव करें। लिक्विड में 1.5 से दो एमएल प्रति लीटर पानी के साथ छिड़काव किया जा सकता है। खेत के चारों ओर खाइयां बनाकर उनमें भी यहीं चूर्ण डाले। लट खेत में बढ़ चुकी हो, तो क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत 25 किलो डस्ट पाउडर प्रति हैक्टेयर या मिथाइल पैराथियॉन, विवनालफॉस या क्यूनालफॉस तरल दवा का छिड़काव करें।
उपज में 50% तक कमी आ सकती है
डॉ सारस्वत ने बताया कि कातरा कीट खरीफ फसलों विशेष रूप से मूंग, बाजरा, ज्वार, चना और दलहनी फसलों के लिए नुकसानदायक है। इसकी लटें (कीड़े के बच्चे) फसलों की पत्तियों को कुतरकर नष्ट कर देती हैं, जिससे पौधे सूखकर मर जाते हैं और उपज में 50% तक कमी आ सकती है। मादा कीट एक बार में 600-700 अंडे देती है, जिनसे 2-3 दिन में लटें निकल आती हैं। ये लटें 40-50 दिनों तक फसलों को नुकसान पहुंचाती हैं, जो इस कीट की सबसे विनाशकारी अवस्था है।











