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जनप्रतिनिधि है या लुटेरे भूमाफिया, राजशाही पट्टे पर भी बना लिये पट्टे, एक पार्षद ने स्वयं के नाम तो एक ने बनवाया अपनी पत्नी के नाम पर, तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ा फर्जीवाड़ा, अब हो रही लीपापोती

Published on: July 24, 2025

The Khabar Xpress 24 जुलाई 2025। श्रीडूंगरगढ़ का तो राम ही रखवाला है। हमने जिन जनप्रतिनिधियों को अपना अमूल्य मत देकर अपना प्रतिनिधि बनाकर श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में भेजा था वही अगर लुटेरे व भूमाफिया बनकर दीमक की तरह खाने लग जाये तो इस शहर की क्या हालत होगी। इस शहर और शहरवासियों के ये सबसे बड़े अपराधी है।

श्रीडूंगरगढ़ के दो युवा पार्षदो ने ऐसा अपराध किया है जो अक्षम्य है। उन्होंने जनता के विश्वास को कुचला है साथ ही युवाओ के नेतृत्व में विकास की बात करने वालो के मुंह को सील दिया है। पार्षद रजत आसोपा और पार्षद पति गोपाल प्रजापत ने कस्बे के आडसर बास में एक राजशाही पट्टे को अपनी पत्नियों के नाम करवा लिया।

संवत 1942 का 1218 दरगज (दरगज – 2X2) का राजशाही पट्टा जो कस्बे के आडसर बास निवासी रावतमल झंवर (माहेश्वरी) के नाम से था उसको 24.02.1942 को उनकी धर्मपत्नी नानू देवी ने चिमना धर्मपत्नी हुकुमचंद कलानी को बेच दिया था। जिनका स्वामित्व उनके वारिसों मोहनलाल, जगदीश प्रसाद, रामकिशन एवं प्रभुदयाल के पास है।

गत सरकार में पट्टा अभियान में कितने ही फर्जी पट्टे बना दिये गए और नगरपालिका सहित बीड़ व गोचर भूमि को भी भूमाफियाओं द्वारा नहीं छोड़ा गया। इसी पट्टा अभियान में इस राजशाही पट्टे के आधे हिस्से को कस्बे के युवा पार्षद पति गोपालराम प्रजापत ने अपनी पार्षद पत्नी सुमन देवी के नाम पर नया पट्टा बनवा लिया।

जबकि इस राजशाही पट्टे के दूसरे आधे हिस्से पर पार्षद रजत कुमार ने अपनी पत्नी बबिता के नाम पर पट्टा बना लिया। कितना बड़ा अपराध है कि चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा ही आमजन के विश्वास का खून कर दिया गया। ऐसे कितने ही पट्टे The Khabar Xpress के पास है जो पूर्णतया अवेध है। नगरपालिका के कार्मिकों द्वारा, बड़े बड़े नामवर लोगो द्वारा भी पट्टे बनवा लिए गए है। कटानी मार्ग तक को भी नहीं बख्शा गया है। जिसके कागजात सुरक्षित है। समय समय पर उन सभी के पट्टे जारी कर इस भ्रष्टाचार पर न्याय का हथौड़ा मारा जाएगा।

माफीनामे के साथ हो रही आपराधिक कृत्य पर लीपापोती

सुनने में आ रहा है कि दोनों जनप्रतिनिधियों को जब पता चला कि उनके अपराध का सभी ओर शोर मच गया है और The Khabar Xpress के पास उनके द्वारा किये गए अपराध का कच्चा चिट्ठा है तो कस्बे के कुछ वरिष्ठजनों एवं नेताओ को साथ लेकर कलानी परिवार एवं उनके रिश्तेदारों के साथ मानमनोव्वल कर माफी मांगी जा रही है कि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही ना की जाए।

सुनने में आया है कि नगरपालिका में भी उन्होंने लिखकर दे दिया है कि भूलवश उनसे ये पट्टे बन गए थे जिसको खारिज कर यथास्थिति रखी जाए। सवाल ये उठता है कि शहर के मध्य में स्थित ऐसी जगहों के पट्टे क्या भूलवश बनाये जा सकते है ?

हो सख्त कानूनी कार्यवाही…

जिस तरीके से इन पट्टो को बनाया गया है उससे पता चलता है कि पट्टा अभियान में कितना बड़ा घोटाला हुआ है। तत्कालीन पटवारी, भू-शाखा कार्मिक, मौका निरीक्षक, जेईएन, अधिशाषी अधिकारी सहित कितने अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया था। ऐसे अधिकारियों ने श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका सहित गोचर भूमि, बीड़ भूमि पर भी पट्टे बना दिये।

सबसे बड़े अपराधी तत्कालीन अधिकारी है जिन्होंने जानते बुझते हुए ऐसे पट्टे अपने आर्थिक लाभ के लिए बना दिये। नगरपालिका के अधिकारियों को ये अधिकार किसने दिया कि वे बीड़ भूमि एवं गोचर भूमि के पट्टे जारी करदे ? क्या पट्टे बनाते समय भूमि का निरीक्षण नहीं किया गया था कि वो बीड़ है या गोचर..?

विधायक करे कार्यवाही

पट्टा अभियान में नगरपालिका, बीड़, गौचर की बेशकीमती जमीन को भूमाफियाओं ने इन अधिकारियों की साँठगांठ से हथिया लिया और पट्टे बना लिए। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाले विधायक ताराचंद सारस्वत अब इन अक्षम्य अपराधों पर क्या कार्यवाही करते है ये भविष्य की गर्त में है। आमजन में विधायक सारस्वत की जो छवि है उसके आधार पर कस्बे के हर आम आवाम को आशा है कि विधायक द्वारा कठोरतम कदम उठाए जायेंगे और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विधायक सारस्वत स्वत: संज्ञान लेकर इस पर कार्यवाही करें यही निर्णय जनता को पसंद आएगा।

जनप्रतिनिधियों द्वारा किये गए ऐसे आपराधिक मामले को जानकर आम जनता का ऐसे जनप्रतिनिधियों से विश्वास लगभग खत्म हो जायेगा।

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