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वृक्षारोपण सिर्फ एक पर्यावरणीय कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का उपहार है, इसे सिर्फ फोटो तक सीमित ना रखे

Published on: July 12, 2025

The Khabar Xpress 06 जुलाई 2025। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है और इसके उपाय भी खोजे जा रहे हैं, ताकि तेज धूप, बढ़ते तापमान से कुछ राहत मिल सके। वैसे देश में 422 पेड़ प्रति व्यक्ति होने चाहिए, ताकि देशवासी और प्रदेशवासी स्वस्थ रह सके। राजस्थान में प्रति व्यक्ति 25 पेड़ का औसत है। हिंदुस्तान में प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या 28 है, यानी अभी हम काफी पीछे हैं, इसलिए दौड़ लगानी पड़ेगी, ताकि 422 पेड़ प्रति व्यक्ति पहुंच जाए।

हर वर्ष भारत में मानसून के आगमन के साथ ही वृहद पौधारोपण अभियानों की एक परंपरा सी बन गई है। सरकारी विभागों, निजी संस्थानों, विद्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा बड़े स्तर पर पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रेस रिलीज़ जारी होते हैं, फोटो खिंचते हैं, सोशल मीडिया पर हैशटैग चलाए जाते हैं और अगले दिन अखबारों की सुर्खियां बनते हैं – “फला विभाग ने लगाए इतने लाख पौधे”, “वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर भारत” इत्यादि। लेकिन जब हकीकत की जमीन पर नज़र डाली जाती है, तो ये पौधे और संकल्प कहीं पीछे छूट जाते हैं।

हरियाली का दिखावा या हरियाली का समर्पण ..?

हर साल हम देखते हैं कि सरकारी अधिकारी, नेता, स्कूल के बच्चे, संस्था प्रमुख बड़े उत्साह से पौधारोपण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। मीडिया को बुलाया जाता है, कैमरे के सामने पौधा रोपा जाता है, एक मुस्कुराता हुआ चेहरा फ्रेम में कैद होता है और फिर… पौधा वहीं छोड़ दिया जाता है, देखभाल के बिना।

वृक्षारोपण अभियान सिर्फ पौधे लगाने और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह गया है। पौधे लगाइए, तस्वीरें खिंचवाइए और फिर जिम्मेदारी भूल जाइए। इसके बाद न पर्यावरण की फिक्र न ही पौधे की देखभाल की। यही सब हो रहा है आजकल। कोई संस्था हो या कोई सरकारी अभियान नेता, कार्यकर्ता और संस्था सदस्य आयेंगे, बैनर लगायेंगे, फोटो खिंचायेंगे और इतिश्री करके भूल जायेंगे।

आंकड़ों की होड़

पर्यावरण मंत्रालय, राज्य सरकारें और कई गैर-सरकारी संगठन बड़े-बड़े आंकड़े पेश करते हैं – “10 लाख पौधे”, “5 करोड़ पौधे”, “विश्व रिकॉर्ड” आदि। लेकिन इनमें से कितने पौधे जीवित रहते हैं, इसका कोई समुचित ट्रैक नहीं होता। 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगाए गए पौधों में से केवल 30% ही जीवित रहते हैं।

करोड़ों का बजट खर्च,
पौधों का कहीं पता नहीं
पौधारोपण कार्यक्रम के तहत यदि पुराने आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो करोड़ों रुपये इस पर खर्च हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पौधों का कोई अता पता नहीं है। गत वर्ष भी राजस्थान की भजनलाल सरकार ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान में पूरे प्रदेश में वृक्षारोपण का अभियान चलाया था जिसमे करोड़ो रूपये लगाये गए थे। लेकिन गत वर्ष लगाए गए इन वृक्षों के हालात क्या है ये जानने वाला कोई नहीं है तो इनकी सुध भी लेने वाला कोई नहीं है। जिस वन विभाग की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी बनती है वो खुद अपनी जमीन और बची खुची जमीन पर उगे हुए पौधों का भी खयाल नहीं रखती।

पेड़ो ने जड़े जमाई हो या नहीं भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें इतनी मजबूती से जमा रखी है कि उनको अब हिलाया भी नहीं जा सकता।

राजस्थान सरकार हरियालो राजस्थान का सपना पूरा करने के लिए प्रदेश में एक बार फिर से अभियान चला रही है। 2025-26 सत्र में भी राजस्थान की भजनलाल सरकार ने “हरियाळो राजस्थान” के अंतर्गत हर नगरपालिका एवं पंचायत क्षेत्र में लाखों रुपयों का बजट दिया है। राजस्थान सरकार ने “हरियालो राजस्थान अभियान” के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है। ये पेड़ लगाए भी जायेंगे लेकिन लगाए गए पेड़ो की कितनी सार-संभाल होगी ये निश्चित नहीं है।

जब तक आम आदमी स्वयं अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब तक ऐसे किसी भी अभियान का सफल होना निश्चित नही है। सिर्फ आलोचना करने से कुछ नहीं होगा। इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान खोजना ज़रूरी है।

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