The Khabar Xpress 02 अप्रैल 2025। बीकानेर जिले में दस पंचायत समिति का पुनर्गठन कर सात नई पंचायत समितियों के निर्माण की तैयारियां जोर शोर से चल रही है। इसी के साथ जिले में पचास से ज्यादा नई ग्राम पंचायतों का गठन भी किया जाएगा। अभी उपखण्ड स्तर पर संभावित पंचायत समितियों और उनमें शामिल किए जाने वाले क्षेत्रों, नई ग्राम पंचायतों के साथ पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के मुख्यालय तय करने के लिए काम चल रहा है। इसी माह की 6 अप्रेल तक उपखण्ड स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर 7 अप्रेल को प्रकाशित किए जाएंगे। इसके बाद आपत्तियां मांगी जाएगी। फिर आपत्तियों का निस्तारण कर प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
वर्तमान में 10 पंचायत समिति और 367 ग्राम पंचायत
बीकानेर जिले में अभी 10 पंचायत समितियां बीकानेर, नोखा, श्रीडूंगरगढ़, खाजूवाला, कोलायत, लूणकरनसर, पूगल, बज्जू, पांचू और हदां हैं। इनमें 367 ग्राम पंचायत हैं। पंचायत पुनर्गठन के तहत बीकानेर पंचायत समिति में शामिल कोलायत विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों से बच्छासर, लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों से बीकानेर और खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों से पैमासर नई पंचायत समिति के गठन पर विचार चल रहा है। इसमें बच्छासर का पंचायत समिति मुख्यालय बीकानेर ही रखने की मांग उठ रही है। ऐसे में बच्छासर की जगह इसे बीकानेर ग्रामीण या बीकानेर पश्चिम नाम से गठित किया जा सकता है।
ये बन सकती है नई पंचायत समितियां
सूत्रों के अनुसार नोखा पंचायत समिति की कुछ ग्राम पंचायतों को तोड़कर जसरासर और ईस्ट नोखा नई पंचातय समिति का गठन किया जा सकता है। श्रीडूंगरगढ़ की कुछ पंचायतों को तोड़कर रिड़ी पंचायत समिति का गठन करने का प्रस्ताव है। खाजूवाला से अलग कर छतरगढ़ पंचायत समिति का गठन करने पर विचार चल रहा है। इसी तरह कोलायत पंचायत समिति की ग्राम पंचायतों को अलग कर गिरिराजसर नई पंचायत समिति गठित की जा सकती है।
पंचायत समिति गठन के लिए कम से कम 15 ग्राम पंचायतों और 20 से अधिक गांव की आवश्यकता पड़ती है। औसतन प्रत्येक पंचायत समिति में पांच-छह नई ग्राम पंचायतों का गठन किया जा रहा है। इस लिहाज से पचास से अधिक नई ग्राम पंचायतों का सृजन किया जा सकता है।
श्रीडूंगरगढ़ में सत्तारूढ़ भाजपा, माकपा और कांग्रेस नई पंचायत समिति के सृजन, उनके क्षेत्र और पंचायत समिति मुख्यालय को लेकर राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन कर रही है। रिड़ी को नई पंचायत समिति बनाने पर होने वाले नफा नुकसान की चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में होने लगी है।








