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धूमधाम से आज मनाई जाएगी विश्वकर्मा जयंती, कस्बे में होंगे धार्मिक अनुष्ठान, देवताओं के पहले इंजीनियर थे भगवान विश्वकर्मा

Published on: February 10, 2025

The Khabar Xpress 10 फरवरी 2025। कस्बे में आज भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। के.के. जांगिड़ ने बताया कि हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व बताया जाता है और इस महीने कई हिंदू पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें से एक है विश्वकर्मा जयंती। वैसे तो हर साल 16 या 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। माघ मास की विश्वकर्मा जयंती को महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के अलावा देश के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल 10 फरवरी 2025 को माघ मास की विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। आज के दिन कस्बे के विश्वकर्मा मंदिर में विशेष हवन और पूजा का कार्यक्रम होगा इसके उपरांत गाजे बाजे के साथ शहर के मुख्य मार्गो से सजीव झांकियां निकाली जाएगी। इस त्योहार का महत्व देश के कई हिस्सों में अत्यधिक है। यह दिन भगवान विश्वकर्मा को समर्पित होता है, जिन्हें ब्रह्मांड के दिव्य वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, देवशिल्पी और संसार के प्रथम इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा भगवान सूर्य के ससुर हैं और वे मृत्यु के देवता यमराज व युमना के नाना हैं। भगवान विश्वकर्मा को प्राचीन काल का सबसे पहला इंजीनियर कहा जाता है। उन्होंने भगवान शिव के त्रिशूल से लेकर कई और भी चीजों का निर्माण किया था। उन्होंने सभी महलों का निर्माण किया है जहाँ भगवान रहते थे। उन्होंने स्थापत्य वेद, यांत्रिकी और वास्तुकला का विज्ञान, पवित्र स्थान द्वारका, जो वर्तमान में गुजरात में है जहाँ भगवान कृष्ण ने शासन किया था, पांडवों की माया सभा और भगवान और देवी के लिए कई हथियार बनाए हैं। उन्होंने स्वर्ग, इंद्रप्रस्थ (भगवान इंद्र का महल), लंका (रावण का महल) और हस्तिनापुर (कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध) का निर्माण किया है।

महत्व

विश्वकर्मा जयंती पर, भक्त भगवान विश्वकर्मा की पूजा अनुष्ठानों और प्रसाद के साथ करते हैं, तथा अपने काम में सफलता और प्रगति के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। यह त्यौहार कड़ी मेहनत, रचनात्मकता और दिव्य प्रेरणा के महत्व को स्वीकार करने का भी अवसर है। विश्वकर्मा जयंती मनाकर, हिंदू ब्रह्मांड में उनके योगदान के लिए भगवान विश्वकर्मा के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं और अपने जीवन में उनके मार्गदर्शन और सुरक्षा की कामना करते हैं।

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