The Khabar Xpress 27 अक्टूबर 2024। बेटियां बेटों से कम नही है। कस्बे की बेटियां प्रशासनिक सेवाओं में चयन होकर अपने परिवार ही नही अपितु पूरे कस्बे को गौरवान्वित कर रही है। श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की बेटी महिमा दुगड़ ने अपने दूसरे प्रयास में ही राजस्थान न्यायिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के जैन समाज से प्रथम महिला जज बनने का गौरव हासिल किया है। पाठकों को बता देवे कि कस्बे से प्रथम महिला जज पूनम पुत्री सत्यनारायण योगी दो वर्ष पुरेव बनी थी जो अभी मकराना में अपनी सेवायें दे रही है। महिमा के अथक परिश्रम और विधिवत अध्ययन के बाद सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट बनने पर घर में खुशियों का माहौल है। महिमा के पिता हनुमान दुगड़ ने बताया कि महिमा का लक्ष्य शुरू से ही जज बनने का रहा है। उसने उसी दिशा में निरन्तर प्रयास किया और आज अपने लक्ष्य को प्राप्त करके परिवार का गौरव बढ़ाया है। महिमा की मम्मी रेखादेवी दुगड़ ने बताया कि महिमा अपने लक्ष्य के साथ काफी मिलनसार और सरल स्वभाव की है। उसने अपने लक्ष्य को पाकर हमें गौरवांवित किया है। जैन समाज के युवा राजू हिरावत ने बताया कि महिमा ने जैन समाज से कस्बे की प्रथम महिला जज बनने का गौरव प्राप्त किया है और इसके साथ ही उसने इस दिशा में प्रयास कर रहे युवक-युवतियों के लिए नजीर पेश की है। राजू हिरावत ने बताया कि मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले महिमा का जज बनना अन्य के लिए प्रेरणादायक है। महिमा के पिता हनुमान दुगड़ के स्वयं के कपड़ों की दुकान है और उसकी माँ गृहिणी है।
महिमा दुगड़ ने बताया कि उसके पापा- मम्मी के साथ उसकी दादी कंचन देवी दुगड़ ने उसका हमेशा साथ दिया। महिमा ने बताया कि आरजेएस का पैटर्न जानने के लिए उसने एक बार पहले भी आरजेएस का एग्जाम दिया था परन्तु उसमें हुआ नहीं तो दुबारा वापिस दिया। इस बार उसने पूरी मेहनत की और उसका चयन हो गया। महिमा ने बताया कि वह रोज 8 घण्टे पढ़ाई करती थी। किसी निजी संस्थान के नोट्स भी पढ़े। ऑनलाइन क्लासेस ली। महिमा ने बताया कि अध्यात्म भी उसके इस सफलता में सहायक बना है जिसके कारण वह हमेशा ऊर्जावान रही।
महिमा को जैन समाज की प्रथम नागरिक सभाध्यक्ष सुशीला पुगलिया, एडवोकेट बाबूलाल दर्जी सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा फोन पर बधाई दी जा रही है।









