द खबर एक्सप्रेस 14 अक्टूबर 2023। पुण्य को किसी भी रूप में अर्जित किया जा सकता है। मृत्य के बाद धन-दौलत और संगे-संबंधी सबकुछ यहीं छूट जाते हैं और व्यक्ति जिस तरह खाली हाथ आता है उसे उसी तरह खाली हाथ ही जाना पड़ता है। यानी मृत्यु के बाद व्यक्ति अपने साथ कुछ भी नहीं लेकर जा सकता है। भौतिक सुखों से जुड़ी सभी चीजें यहीं धरी की धरी रह जाती है, लेकिन व्यक्ति द्वारा किए कर्म उसके साथ जाते हैं। इसलिए जीवन में हमेशा अच्छे और पुण्य कर्म ही करने चाहिए। इसका वर्णन वेद, पुराण और धर्म ग्रंथों में भी स्पष्ट रूप से मिलता है कि, व्यक्ति द्वारा किए कर्म न केवल इस जन्म बल्कि अगले जन्म तक उसके साथ रहते हैं। मृत्यु के बाद भी पुण्यात्मा की सद्गति के लिए धर्मानुसार कार्य किये जा सकते है। स्वर्गीय शोभा चंद जी घोड़ेला की पुण्य स्मृति में घोड़ेला परिवार द्वारा सर्व धर्म मुक्तिधाम मोमासर बास श्रीडूंगरगढ़ के बाहर विश्राम चौक (बिचला बासा चौकी) का निर्माण कराया गया। जिसका आज प्रजापति समाज के गणमान्य सदस्यों द्वारा लोकार्पण किया गया। इस दौरान आईदान बासनीवाल, डूंगरमल प्रजापत, विनोद घोडेला, रमेश प्रजापत, नंद किशोर बासनीवाल, रमेश बासनीवाल, सीताराम बोरावड़, भोजराज घोडेला, रामानंद प्रजापत, रामचंद्र छापोला,
भवरलाल कुचेरिया, बाबूलाल अडावलिया, अशोक बासनीवाल एवं समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पुण्य किसी भी रूप में अर्जित किया जा सकता है- घोड़ेला परिवार ने मुक्तिधाम के बाहर बनवाई “विश्राम चौकी”
Published on: October 14, 2023










