द खबर एक्सप्रेस 08 अक्टूबर 2023। राजस्थान विधानसभा चुनाव जल्द ही होने जा रहे है। राजस्थान की कुल 200 विधानसभा सीटों पर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है बीजेपी और कांग्रेस। राजस्थान के राजनैतिक इतिहास पर नजर डालें तो कांग्रेस की 21 और बीजेपी की 60 सीटें फिक्स हैं जो कभी भी बदली ही नहीं गयी। राजस्थान की सरकार किसकी बनेगी यह बची हुई 119 सीटो के परिणाम पर निर्भर करता है।
राजस्थान के चुनावी घमासान में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और रालोपा सहित अन्य पार्टियां अपनी ताकत लगा रही है। लेकिन राजस्थान की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए भाजपा और कांग्रेस की असल खींचतान 119 सीटों पर रहती है। प्रदेश में 60 सीट ऐसी हैं जिन पर आजतक भाजपा का कब्जा रहता आया है तो 21 सीटों पर कांग्रेस जीतती आई है, लेकिन प्रदेश की 119 सीटें ऐसी हैं जिनको जीतने के लिए दोनों ही पार्टियो के बीच राजनीति घमासान होता है। इन सीटों पर जीत-हार ही सत्ता का दरवाजा खोलती है।
भाजपा का इन सीटो पर रहता है कब्जा
अगर विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा को 5 बार पाली में जीत मिली है। जबकि 4 बार उदयपुर, लाडपुरा, रामगंज मंडी, सोजत, झालरापाटन, खानपुर, भीलवाड़ा, ब्यावर, फुलेरा, सांगानेर, रेवदर, राजसमंद, नागौर में जीत दर्ज की है, साथ ही कोटा साउथ, बूंदी, सूरसागर, भीनमाल, अजमेर नॉर्थ, अजमेर साउथ, मालवीय नगर, रतनगढ़, विद्याधर नगर, बीकानेर ईस्ट, सिवाना, अलवर सिटी, आसींद में 3 बार बीजेपी ने जीत दर्ज कराई, जबकि 33 सीटों पर 2 बार भाजपा को जीत मिली है।
कांग्रेस को इन पर मिलती रही है जीत
अगर कांग्रेस की बात करें तो 5 बार जोधपुर की सरदारपुरा सीट से कांग्रेस को जीत मिली जो राजस्थान के कद्दावर नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट मानी जाती है। जबकि बाड़ी सीट पर 3 बार कांग्रेस जीती, 3 बार झुंझुनू में बागीदौरा, सपोटरा, बाड़मेर, गुढ़ामालानी, फतेहपुर में कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई, साथ ही डीग कुमेर, सांचौर, बड़ी सादड़ी, चित्तौड़गढ़, कोटपूतली, सरदारशहर सहित 13 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली है।
प्रदेश की कुछ प्रमुख सीटों पर पार्टियों का परफॉर्मेंस
उदयपुर में 25 साल से कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। 51 साल में 11 चुनाव हुए लेकिन कांग्रेस सिर्फ 1985 और 1998 में जीती थी। इसी तरह फतेहपुर में 1993 के चुनाव में आखिरी बार भंवरलाल ने जीत हासिल की, उसके बाद बीजेपी कभी नहीं जीत पाई। बस्ती में कांग्रेस 1985 में अंतिम बार जीती थी, 38 साल में कांग्रेस को कभी सफलता नहीं मिली। पिछले तीन चुनाव लगातार निर्दलीय उम्मीदवार बस्ती सीट से जीते हैं। कोटपूतली में 1998 के चुनाव में बीजेपी के रघुवीर सिंह जीते थे, उसके बाद भाजपा की इस सीट पर कभी वापसी नहीं हुई, तो प्रदेश की सांगानेर सीट से 1998 के चुनाव में कांग्रेस से आखरी बार इंदिरा मायाराम जीती थीं, उसके बाद कांग्रेस यहां कभी नहीं जीत पाई।
वे सीटे जिन पर दोनों पार्टियां मजबूत…
चुरू जिले की रतनगढ़ सीट में 1998 में कांग्रेस के जयदेव प्रसाद इंदौरिया अंतिम बार जीते थे। फिर कांग्रेस की सीट पर वापसी नहीं हुई। सिवान में 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के गोपाराम मेघवाल जीते थे, उसके बाद कांग्रेस का सीट पर खाता नहीं खुला। इस तरह से अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट जातीय समीकरण के आधार पर रहती है। यहां हिंदू-मुस्लिम का चुनाव रहता है। बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ सीट पर बदलाव होते रहते है। वर्तमान ये सीट कॉमरेड के खाते में है, उससे पहले ये भाजपा के पास थी और उससे पहले यहाँ पर कांग्रेस के मंगलाराम गोदारा 1998 विधानसभा चुनाव से 3 बार लगातार विजय हुए थे










