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4 मार्च को होगी श्री सरसजी महाराज मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा, ठुकरियासर में प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकार देंगे संगीतमय प्रस्तुतियां, पोस्टर का विमोचन

Published on: February 14, 2026

The Khabar Xpress 14 फरवरी 2026। सारस्वत समाज के आराध्य श्री सरसजी महाराज के ठुकरियासर स्थित निर्माणाधीन मंदिर में कल शुक्रवार को श्री सरस जी महाराज मन्दिर निर्माण समिति की बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय सरस सेना के मीडिया प्रभारी सम्पत सारस्वत ठुकरियासर ने बताया कि आगामी 4 मार्च 2026 को श्री सरसजी महाराज मंदिर के गृभगृह में श्री सरसजी महाराज की मूर्ति की स्थापना कर प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।

श्री सरस जी महाराज मन्दिर निर्माण समिति के अध्यक्ष तुलसीराम सारस्वा की अध्यक्षता में आयोजित मीटिंग में प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजन के पोस्टर का विमोचन किया गया। इस दौरान समिति उपाध्यक्ष मदन लाल सारस्वा, सचिव मदन लाल तावणियाँ और समिति वरिष्ठ सदस्य भैराराम शर्मा, श्रीराम सारस्वा, जगदीश प्रसाद, बजरंगलाल, सत्यनारायण, नन्दलाल नाई, महावीर प्रसाद शर्मा, राष्ट्रीय सरस सेना अध्यक्ष हनुमान सिंह गोदारा, राष्ट्रीय सरस सेना उपाध्यक्ष भरत शर्मा, गोपालराम शर्मा श्री भगवन शर्मा, देव सारस्वत, नरेंद्र नाथ भादू भी मौजूद रहे।

राष्ट्रीय सरस सेना अध्यक्ष हनुमान सिंह गोदारा ने बताया कि मंदिर के गृभगृह में वैदिक रीति व मंत्रोच्चार के साथ सम्पूर्ण विधि विधान पूर्वक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की जायेगी और रात्रि में श्री सरसजी महाराज का भव्य जागरण रखा गया है। इस जागरण में राजस्थान के ख्यातिप्राप्त कलाकारों द्वारा संगीतमय प्रस्तुतियां दी जाएगी। जागरण में प्रसिद्ध भजन गायक गजेंद्र अजमेरा, खेमाराम धायल एंड पार्टी, डी सी धारीवाल, और साँवर मान्झु एंड पार्टी के द्वारा भजनगंगा बहेगी।

भागीरथ प्रसाद सारस्वत ने बताया की यह राजस्थान का पहला ऐसा मन्दिर है जो अंदर से पूरा शीशे की जड़ाई से निर्मित है और राज ऋषि सरस जी महाराज के सैंकड़ो वर्ष पहले के जीवन प्रसंग एवं इतिहास को सजीव रूप दिया गया है। राष्ट्रीय सरस सेना अध्यक्ष हनुमान सिंह गोदारा ने बताया कि श्री सरस जी महाराज को सारस्वत ब्राह्मण समाज अपने आराध्य देव और गोदारा एवं मुंड जाति के जाट अपने कुलगुरु के रूप में पूजा करते हैं। श्री सरसजी महाराज का सबसे प्राचीन मंदिर श्रीडूंगरगढ़ के मुख्य बाजार में स्थित है जहां सभी वर्गों के लोग दर्शनार्थ जाते है।

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