The Khabar Xpress 10 अप्रेल 2026, श्रीडूंगरगढ़। भारतीय चुनावी प्रक्रिया को दुनिया की सबसे भरोसेमंद व्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन समय-समय पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर उठते सवाल इस भरोसे को चुनौती भी देते रहे हैं। अब पहली बार ऐसा हुआ है जब कोर्ट ने सीधे तौर पर ईवीएम की तकनीकी जांच का रास्ता खोल दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक सीट या एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे चुनावी सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बड़ी बहस को जन्म देता है। यह कदम बताता है कि लोकतंत्र में सवाल पूछने की जगह अभी भी जिंदा है और संस्थाएं जवाबदेही तय करने के लिए तैयार हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए EVM को चेक करने का आदेश दिया है। इसके बाद मशीन की कंट्रोल यूनिट समेत दूसरे कुछ पार्ट्स को चेक किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पहली बार है, जब चुनावों के बाद EVM को चेक किया जाएगा। फैसले के बाद मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट की डिप्टी रिटर्निंग ऑफिसर अर्चना कदम ने बताया कि 16 और 17 अप्रैल को मुंबई में EVM मशीन का डायग्नोस्टिक चेक किया जाएगा। आइए जानते हैं कि इस डायग्नोस्टिक चेक कौन करेगा और इसमें किन पार्ट्स की जांच की जाएगी।

कौन करेगा EVM का Diagnostic Check ?
EVM का इंस्पेक्शन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के इंजीनियर करेंगे। बेंगलुरू स्थित BEL ही EVM मशीनें बनाती हैं। 16 और 17 अप्रैल को जब मशीन का डायग्नोस्टिक चेक किया जाएगा तब कांग्रेस नेता नसीम खान, उनकी तरफ से लाए गए एक एक्सपर्ट और चुनाव अधिकारी मौजूद रहेंगे। खान को मशीन की बर्न्ट मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर को चेक और वेरिफाई करने की परमिशन होगी। उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान इस्तेमाल उनके विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल हुईं 5 प्रतिशत मशीनों को इंस्पेक्ट करने की इजाजत मिली है। यानी करीब 20 मशीनों को इंस्पेक्ट किया जाएगा।
EVM Diagnostic Check में किन पार्ट्स की होगी जांच ?
Diagnostic Check में EVM के कुछ पार्ट्स की ही जांच की जाएगी. इनमें कंट्रोल यूनिट सबसे प्रमुख है। यह यूनिट पूरा डेटा स्टोर करती है और पूरी पॉलिंग प्रोसेस भी इसी से कंट्रोल होती है। यही यूनिट टोटल डाले गए वोट और रिजल्ट दिखाती है। कुछ बटन दबाकर इससे पूरी पॉलिंग प्रोसेस की जानकारी ली जा सकती है। इसके अलावा बैलट यूनिट को भी चेक किया जाएगा। बैलट यूनिट एक सिंपल वोटिंग डिवाइस होता है। इस पर कैंडिडेट की लिस्ट लगी होती है। वोटर को इनमें से अपनी पसंद के कैंडिडेट के नाम वाला बटन दबाना होता है। डायग्नोस्टिक चेक में VVPAT यानी वोटर वेरिफाईबल पेपर ऑडिट ट्रेल की भी जांच की जाएगी। VVPAT वो मशीन होती है, जो वेरिफिकेशन के लिए पेपर स्लिप प्रिंट करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था
नसीम खान ने सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा था कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 5 फीसदी (कंट्रोल यूनिट, वीवीपैट और बैलेट यूनिट) के बर्न्ट मेमोरी, माइक्रोकंट्रोलर की जांच चुनाव परिणाम आने के बाद ईवीएम निर्माता कंपनियों और इंजीनियरों को करनी चाहिए। खान ने कहा, यह एक बड़ा फैसला है। अब तक किसी कोर्ट ने ईवीएम की जांच का आदेश नहीं दिया। यह पहले आदेश है और हम इसका स्वागत करतेहैं। खान ने कहा कि कम से कम 20 ईवीएम की जांच होगी।
बता दें कि चांदीवली सीट पर शिवसेना के दिलीप भाऊसाहेब लांडे को कुल 1,24,641 वोट मिले थे। मोहम्मद आरिश नसीम खान 104016 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन को 288 में से 230 सीटें मिली थीं। बीजेपी 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी। वहीं शिवसेना (यूबीटी) को 20, एनसीपी (SP) को 10 और कांग्रेस को 16 सीटें हासिल हुई थीं।
सोर्स-गूगल








