The Khabar Xpress 13 फरवरी 2026। 23 अक्टूबर 2015 की वो काली रात जिसने शांतिप्रिय एवं साम्प्रदायिक सौहार्द्र के इस शहर को एक ना भूलने वाले घटनाक्रम में झोंक दिया। ये शहर इस आग से कई दिनों तक झुलसता रहा और जिसका असर आजतक इस शहर के वाशिंदों पर रहा। आज उस ना भूलने वाले घटनाक्रम का पटाक्षेप स्थानीय एडीजे कोर्ट के फैसले से हो गया।
मामले के पैरोकार एडवोकेट रामलाल नायक ने बताया कि 23 सितंबर 2015 को हुए घटनाक्रम के विरोध में 31 अक्टूबर 2015 को श्रीडूंगरगढ़ पुलिस थाना में मुकदमा दर्ज करवाया गया। आज 13 फरवरी को इस मामले में आरोपी 6 युवकों गौरीशंकर पुत्र लक्ष्मीनारायण स्वामी व रामचंद्र पुत्र बनवारीलाल सुथार मोमासर बास, हरिओम पुत्र रमेश कुमार ब्राह्मण, चंद्रप्रकाश पुत्र सत्यनारायण ब्राह्मण, अंकित पुत्र महेश कुमार ब्राह्मण व किशनलाल पुत्र राजकुमार सिकलीगर कालुबास को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन युवकों पर दुकानों व प्याऊ पर आग लगाने व तोड़फोड़ करने के आरोप थे।

आरोपियों को 11 मई 2016 को गिरफ्तार करने के बाद 19 मई को जमानत मिल गयी जिसका फैसला न्यायाधीश सरिता नौशाद ने आज 13 फरवरी 2026 को करके उन्हें बरी कर दिया। इन दस सालों में आरोपियों ने न जाने कितनी तारीखें झेली और ना जाने कितनी मानसिक प्रताड़ना से होकर गुजरना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता सहीराम सायच ने बताया कि इस पूरे मामले में एडवोकेट रामलाल नायक, मालाराम सायच, पार्षद मघराज वाल्मीकि, मनीष सायच का अभूतपूर्व योगदान रहा। इन्होंने इन युवकों को जरूरत के वक़्त सम्बल प्रदान किया।
बता देवे कि इस घटनाक्रम में आरोपी रहे गौरीशंकर स्वामी की शादी 8 मई 2016 को हुई थी और वैवाहिक रीति रिवाजो के पूर्ण होने से पहले ही 11 मई को उनकी गिरफ्तारी हो गयी।










