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श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका का एक ओर कारनामा, भूखण्ड का नाप गलत लिखकर सरकार को पहुंचा रहे आर्थिक नुकसान या अपनो को फायदा

Published on: January 20, 2026

The Khabar Xpress 20 जनवरी 2026। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका ने तो जैसे सौगंध ही ले रखी है कि हम अपना काम किसी के भी दबाव में ईमानदारी से नही करेंगे। हम पर चाहे कितना ही दवाब क्यों ना आजाये लेकिन हम करेंगे अपनी ही मनमानी। नगरपालिका में हुए पट्टा भ्रष्टाचार, फ़र्ज़ी भर्ती पर न्यूज़ निकालने के बाद भी ना तो सरकार ने कोई एक्शन लिया ना ही प्रशासन ने इसकी जांच करवानी जरूरी समझी। ऐसा जान पड़ता है कि किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा कि नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ की कार्यप्रणाली क्या है…?

अपना फायदा – सरकार को नुकसान

नगरपालिका के पदाधिकारियों ने शायद ये ठान रखा है कि “अपना काम बनता” बाकी चाहे कुछ भी हो। अपने फायदे के लिए सरकार को नुकसान उठाना पड़े तो पड़े। क्योंकि इस घटना को देखकर तो यही लग रहा है कि जो गणना एक आम इंसान करके दे सकता है उसको इन पदाधिकारियों ने ऐसे कैसे कर दी।

ताज़ा मामला सामने आया है कि नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ के अधिशाषी अधिकारी श्रीवर्धन शर्मा ने गत 26 दिसम्बर 2025 को औद्योगिक निर्माण स्वीकृति जारी करने हेतु एक आपत्ति आमंत्रण सूचना जारी की है। जिसकी हेडलाइन तो औद्योगिक निर्माण की है परंतु बताया ये गया है कि आवेदक ने आवासीय निर्माण की स्वीकृति प्राप्त करने हेतु आवेदन लगाया है।

एक बारगी ये मान लिया जाए कि लिपिकीय भूल हो सकती है और विभागीय कागजो पर इतने हस्ताक्षर अधिशाषी अधिकारी को करने पड़ते है तो पढ़ने का वक़्त नहीं मिलता होगा। परन्तु ये समझ मे नहीं आता कि कोई भूखण्ड जिसका नाप 40’11 (उत्तर) x 121’5 (दक्षिण) x 161’6 (पूर्व) x 140 (पश्चिम) इस प्रकार का है उसका वर्गफुट क्षेत्रफल 2400 ही कैसे हुआ ? कहीं ये किसी अपने को फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं हुआ…? ये औद्योगिक स्वीकृति है तो इसकी निर्माण राशि भी अधिक होती जो अब पांच गुनी कम आएगी और सरकार को सरासर चुना लगाया जाएगा। अंदरखाने की चर्चा ये है कि देखा केवल स्वहित ही गया है।

तहसीलदार एवं कार्यकारी अधिशाषी अधिकारी से जब इस बारे में जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

आखिर ये किस साइज का पट्टा होगा…?

कुछ जमीनों के जानकारों एवं वकील व गणित के विशेषज्ञों से जब इसकी जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि ये लगभग 12235 से 40 वर्गफुट के करीब होगा। जो कि नगरपालिका द्वारा अखबारों में दी गयी सूचना से पांच गुणा कम है।

अब सवाल ये है कि ये भूल है या किसी को फायदा पहुंचाया गया है..?

आम आदमी के वश में नहीं है जगह का पता लगाना

श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका द्वारा जो अखबारों में आपत्ति आमंत्रण की सूचना जारी की जाती है, उसको देखकर आम आदमी ये कभी भी पता नहीं लगा सकता कि ये जो आवेदक है और जिस जगह की ये आपत्ति चाही गयी है वो जगह कौनसी है और कहां पर स्थित है…? क्योंकि आवेदक की चाही गयी सूचना का पूरा पत्ता (एड्रेस) ही कहीं नहीं लिखा जाता यानी कोई आपका पड़ोसी भी अनापत्ति मांग रहा है तो भी आपको ज्ञात नहीं होगा। कुछ उदाहरण नीचे है जिसमे गोपनीयता के लिए आवेदकों के नाम छुपा दिए गए है। इसमें देखकर कोई भी आम नागरिक ये नहीं बता सकता कि कहीं ये उनके पड़ोसी तो नहीं ? ना ही इस सूचना से ये जानकारी मिल रही है कि ये जगह कौनसी है ?

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