The Khabar Xpress 17 जनवरी 2026। “राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट। अंत समय पछताएगा, जब प्राण जाएंगे छूट” इसी तर्ज पर भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका अपना कार्य कर रही है।
“नगरपालिका की लूट है, लूट सके तो लूट।
अंत समय है आगया, मौका न जाये छूट।।”
श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका का वर्तमान कार्यकाल इसी 7 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। 2021 में 28 जनवरी को नगरपालिका के चुनाव हो चुके थे एवं 8 फरवरी को वर्तमान नगरपालिका सदस्यो ने शपथ ले ली थी। नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ के इस कार्यकाल के अंतिम दिन चल रहे है और इस भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नगरपालिका अब कोई भी मौका नहीं छोड़ रही इसे निचोड़ने में। इस नगरपालिका ने कभी फ़र्ज़ी पट्टे बनाने में, कभी फ़र्ज़ी बिल भुगतान करने में तो कभी कर्मचारियों की फ़र्ज़ी भर्ती करने में नगरपालिका ने रिकॉर्ड कायम किया है। पार्षदों ने ही राजशाही पट्टों पर पट्टे बना लिए थे।
आपदा को अवसर बनाने के लिए कटिबद्ध नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़
अभी वर्तमान में श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका द्वारा संचालित डंपिंग ग्राउंड में असंख्य गौवंश की अकाल मौत का मामला सुर्खियों में रहा है। नगरपालिका प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में ढिलाई बरती गई और गौसेवकों को मृत गौवंश के पोस्टमार्टम के लिये में भी न्यायालय की शरण मे जाना पड़ा और न्यायपालिका ने पोस्टमार्टम के आदेश भी जारी कर दिए। नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ ने इस पूरे प्रकरण को आपदा में अवसर की तरह लिया। सम्पूर्ण कस्बे सहित पूरे क्षेत्र में पता है कि इस घटना के तुरंत बाद ही नगरपालिका ने डंपिंग ग्राउंड पर पोकलेन मशीन द्वारा सड़क किनारे फैले कचरे को अंदर धकेलना शुरू कर दिया था। लेकिन आज इतने दिनों के बाद नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ द्वारा गत 15 जनवरी को श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका ने क्षेत्र में बने डंपिंग यार्ड पर एकत्रित कचरे के ढेर को किराए पर पोकलेन मशीन द्वारा उठाने की निविदा जारी की। निविदा में निविदा फॉर्म मिलने, निविदा जमा करने एवं निविदा खोलने की तारीख 20 जनवरी लिखी है। कितना बड़ा भ्रष्टाचार है कि जो काम पहले ही हो चुका है उसकी निविदा अब जारी की गई है और निविदा के लिए सिर्फ एक ही दिन का समय दिया गया है।
9.90 लाख की अनुमानित लागत ही इस निविदा को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है। जानकारों का कहना है कि इतनी लागत से तो पूरे शहर में मशीन लगाई जा सकती है। खैर नगरपालिका अपने अंतिम दिनों में है तो इसका खजाना खाली करने की जिम्मेदारी भी तो इनकी ही है।

इस निविदा के अलावा श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका ने 4.90 लाख के पोकलेन मशीन द्वारा काम करवाने की भी निविदा जारी की है। अब उन्हें ये कार्य कहाँ करवाना है वो कर्ताधर्ता ही जाने पर अंदरखाने चर्चा ये है कि ये तो इस पूरे प्रकरण की भरपाई है। कहीं इस डंपिंग ग्राउंड को सोने की मुर्गी तो नहीं बनाया जा रहा..?
खैर कहने वाले कहते रहेंगे… श्रीडूंगरगढ़ की आम आवाम ने काबिल हाथों में अपनी बागडोर सौंपी थी और ये सभी जनप्रतिनिधि आमजन की कसौटी पर बिल्कुल खरे उतरे है।











