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निःशब्द…..

Published on: January 7, 2026

The Khabar Xpress 07 जनवरी 2026। श्रीडूंगरगढ़ शहरवासियों की आत्मा जैसे सुप्त ही हो गयी है। नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ द्वारा शहर का कचरा डंप करने की जगह पर सम्पूर्ण कस्बे के कचरे सहित मेडिकल कचरा भी डाला जा रहा है। शहर की सबसे बड़ी सेवा संस्था आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ SDGH सेवा समिति ने जब प्रशासन का ध्यान डंपिंग ग्राउंड की तरफ दिलाया और सच्चाई सब रखी तो आत्मा ही कांप उठी। हमारा धर्म, हमारी संस्कृति जिस गाय को हमारी जन्मदात्री से भी बड़ी मानता है उसका ही अस्तित्व खतरे में है। डंपिंग ग्राउंड चारो तरफ से खुला हुआ है। ना कोई चारदीवारी और ना ही कोई तारबंदी। जिसके कारण आजाद गौवंश अपने पेट की भुख मिटाने के लिए डंपिंग ग्राउंड में घुस जाती है और नगरपालिका द्वारा फेंके जाने वाले मेडिकल कचरे और प्लास्टिक थैलियों में अपना भोजन तलाशती है। गौवंश ये प्लास्टिक तो खाती ही है साथ ही उनके पेट मे नामालूम कैसी कैसी दवाईयां भी उनके पेट मे चली जाती है जिससे वे अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रही है।

मरी हुई आत्मा का ज़िंदा शहर बन गया है श्रीडूंगरगढ़

वीडियो में जो दृश्य देखा वो दृश्य बड़ा ही हृदय विदारक और आत्मा को झकझोर देने वाला दृश्य है। लेकिन श्रीडूंगरगढ़ शहर तो जैसे जिंदा लोगो का मरा हुआ शहर बना हुआ है। ये घटना सिर्फ एक खबर बनी जबकि ये सामुहिक जघन्य हत्याकांड है। तथाकथित गौसेवक, कागजो में बने गौ विधायक एवं स्वयम्भू गौसेवक पता नहीं कहाँ चले गए जो गाय को अपने बचाव के लिए भी कोई छोटा सा पत्थर मार दे तो वे अपने लाव लश्कर के साथ सामने वाले व्यक्ति पर चढ़ जाते है। सोशल मीडिया पर अपनी शेख़ी बघारते है कि उन्होंने गौवंश के लिए ना जाने कितना ही बड़ा महासंग्राम लड़ा हो। लेकिन वे सभी चुप है, शांत है और सो रहे है, क्यो….? क्योंकि वहां शायद उनका कोई स्वार्थ सिद्ध नही हो रहा होगा।

प्रशासन के खिलाफ जो हजारों लाखों आवाज़ें उठनी चाहिये थी वो सिर्फ चंद युवाओं की ही आवाज़ बन पाई। वो भी इसलिए कि उनकी आत्मा ज़िंदा है। उनका हृदय ये देखकर रोया है। बाकी सब मौन है। क्योंकि हम तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही अपना ज़िंदा होने का सबूत देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे है।

नगरपालिका प्रशासन और उसकी कार्यप्रणाली तो किसी से छुपी हुई नहीं है। उन्होंने किया भी वही जिसकी उनसे आशा ही कि जा सकती थी। दिखावे के लिए डंपिंग ग्राउंड फेसिंग के आदेश दे दिए और दो कर्मचारियों की ड्यूटी वहां लग जायेगी। लेकिन सवाल ये है कि क्या उनको पहले कभी दिखाई नहीं दिया कि वहां पर गौवंश मर रहे है और गिद्धों का भोजन बन रहे है। सब पता है उन्हें, लेकिन उन्हें ये भी पता है कि ये शहर कुछ भी नहीं बोलेगा चाहे हम कुछ भी कर ले। होना तो ये चाहिए था कि कचरा निस्तारण का समुचित उपाय हो लेकिन ऐसी योजनाएं बने वो इच्छाशक्ति इस शहर के जनप्रतिनिधियों में ना पहले रही है ना अब है। उन्हें तो सिर्फ ये दिखाई देता है कि इस शहर के संसाधनों को कैसे गिद्ध की तरह नोचकर खाया जाए।

कितनी बड़ी विडंबना है कि सेवा समिति की सूचना पर जब कल प्रशासन हरकत में आया तो डंपिंग यार्ड के बाहर सड़क पर ही फ़ोटो सेशन करवाकर इतिश्री कर ली गयी। अंदर जो सैंकड़ो मीटर कचरे के ढेर है। वहां गौमाता के क्षत विक्षत शव बिखरे पड़े है। उनके नजदीक कोई ना गया। ये सिर्फ हम नही सभी न्यूज़ चैनल्स की फ़ोटो बयान कर रही है।

शायद कोई जागे जो शहर के विकास के बारे में सोचे ना कि अपने विकास के बारे में

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