The Khabar Xpress 06 जनवरी 2026। श्रीडूंगरगढ़ की नगरपालिका भ्रष्टाचार की गढ़ बन चुकी है। कभी पट्टा अभियान के अंतर्गत जारी किए गए पट्टो को लेकर तो कभी अनियमित भुगतान के आरोप इस नगरपालिका पर लगते ही ही रहे है। अब नगरपालिका में फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। ये राजस्थान में अपनी तरह का पहला ही मामला लग रहा है जिसमे कर्मचारियों को नियमो को ताक पर रखकर नियुक्तियां दे दी गयी। सूत्रों ने बताया कि ये स्पष्ट रूप से नगरपालिका चेयरमैन, नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी (ईओ) एवं नगरपालिका में कार्यरत संविदाकार्मिक की सांठगांठ का मामला है।
ये है मामला
सूत्रों के अनुसार पूर्व विधायक कॉमरेड गिरधारी लाल महिया के राज में कांग्रेस सरकार के वक़्त तत्कालीन ईओ कुंदन देथा, चेयरमैन मानमल शर्मा और नगरपालिका में संविदाकार्मिक मोतीलाल नाई ने आपसी मिलीभगत से स्वयं मोतीलाल सहित 9 कर्मचारियों को नियम विरुद्ध सफाई भर्ती में नियुक्तियां दे दी। सबसे बड़ी बात ये है कि इन 9 सफाईकर्मियों का किसी भी तरह का सेवा रिकॉर्ड नगरपालिका में आजतक नहीं है। प्रथमदृष्टया ये भी सिद्ध होता है कि इन नियुक्तियों में किसी भी प्रकार के नियमो की पालना नही की गई है। इन सफाईकर्मियों की नियुक्ति के संदर्भ में ना तो तत्कालीन DDR बीकानेर (क्षेत्रीय उपनिदेशक) से और ना ही तत्कालीन बीकानेर जिला कलेक्टर से स्वीकृति ली गयी है।
आरटीआई से नहीं मिली जानकारी
नगरपालिका में इन 9 सफाईकर्मियों की नियुक्ति के सेवा रिकॉर्ड की आरटीआई के माध्यम से जब सूचना चाही गयी तब वर्तमान अधिशाषी अधिकारी श्रीवर्धन शर्मा ने आरटीआई के जवाब में लिखा कि कार्मिकों की अचल संपत्ति की जानकारी देना सम्भव नहीं है।

सूत्रों के अनुसार 30 जनवरी 2024 को ही तत्कालीन प्रशिक्षु आईएएस जो नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी बनकर आये थे। उन्होंने 6 फरवरी 2024 को संस्थापन शाखा के निरीक्षण में पाया कि 9 सफाई कर्मचारियो का सेवाकाल से संबंधित कोई रिकॉर्ड श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में नहीं है जबकि उनको निरन्तर वेतन भुगतान किया जा रहा है। प्रशिक्षु आईएएस ने इन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया। जिसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। 14 फरवरी 2024 को दोबारा नोटिस दिया गया जिसके फलस्वरूप सिर्फ 2 कर्मचारियों सोनू तेज़ी और मोतीलाल नाई ने इसका जवाब लिखा कि उन्हें अंतिम भुगतान प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।
2 कर्मचारियों का ट्रांसफर लेकिन डिस्पेच रजिस्टर में दर्ज ही नहीं
सूत्रों ने ये भी बताया कि श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में पोल में ढोल किस प्रकार बजाया गया है इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका द्वारा 2 कर्मचारियों मोतीलाल नाई और सोनू तेज़ी के ट्रांसफर बीकानेर नगरनिगम में होने के बाद 23 जनवरी 2024 को लिखित में कार्यमुक्त आदेश जारी कर दिए गए, जिसका कोई रिकॉर्ड नगरपालिका के डिस्पेच रजिस्टर में दर्ज नही है। इस आदेश पर श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष मानमल शर्मा एवं तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी के हस्ताक्षर है। इसका मतलब की कार्यमुक्त आदेश बिना डिस्पेच के ही बीकानेर नगरनिगम चले गए।
बताया ये भी जा रहा है कि फर्जीवाड़े की इंतहा तो तब हो गई जब श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका द्वारा बीकानेर नगरनिगम आयुक्त को पत्र लिखकर सोनू तेज़ी एवं मोतीलाल नाई के सेवा रिकॉर्ड श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में भिजवाने का लिखा गया जो आजतक नहीं मिला।
जब भाई थानेदार तो डर काहे का…. यही हाल रहा इन फर्जी 9 सफाईकर्मियों में से एक विजयराज नाई का। बताया जा रहा है कि ये मोतीलाल नाई का सगा भाई है और ये भी बताया जा रहा है कि ये शत प्रतिशत दिव्यांग है (जो बिस्तर से हिल भी नही सकता है) फिर भी इसको नौकरी दे दी गयी क्योंकि देने वाला तो भाई ही था जो खुद फर्जीवाड़ा करके नौकरी लगा है। कस्बे के नागरिक पुखराज पारीक द्वारा विजयराज नाई का भौतिक सत्यापन करने का पत्र लिखा था जिसका भौतिक सत्यापन आजतक नही हुआ और ना ही तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी संदीप विश्नोई द्वारा इसके सत्यापन के आदेश दिए गए। मोतीलाल नाई की सांठगांठ से इसे टाला जाता रहा।
गत 24 दिसम्बर 2025 को हमने वर्तमान अधिशाषी अधिकारी श्रीवर्धन शर्मा को लिखित में विजयराज नाई का फिजिकल वेरिफिकेशन करने के लिए पत्र लिखा जिसका जवाब आजतक नहीं मिला।

तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी कुंदन देथा ने दे दी नियम विरुद्ध नियुक्तियां
सूत्रों ने ये भी बताया कि श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में पहले से सेवारत संविदाकार्मिक मोतीलाल नाई की मिलीभगत और सांठगांठ से तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी कुंदन देथा द्वारा इन 9 सफाई कर्मचारियों को नियम विरुद्ध नियुक्ति दे दी गयी। ये समस्त राजस्थान में अपनी तरह का पहला बड़ा फर्जी भर्ती घोटाला है। इन कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड नगरपालिका में नही होना बताता है कि इनकी नियुक्ति प्रक्रिया में ना तो क्षेत्रीय उपनिदेशक (DDR) से सहमति ली गयी और ना ही जिला कलेक्टर से।
ऐसी भी जानकारी मिली है कि जब इन कार्मिकों के सेवा रिकॉर्ड के बारे में तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी कुंदन देथा से नगरपालिका से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने ये सभी रिकॉर्ड नगरपालिका कार्मिक नरेश तेज़ी के पास होना बताया। जबकि नरेश तेज़ी से वार्ता होने के बाद उसने अपने पास किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही।
श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचन्द सारस्वत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार और श्रीडूंगरगढ़ में कॉमरेड के शासन काल मे नगरपालिका में भ्रष्टाचार चरम पर था जिसके खिलाफ मैंने विधानसभा में भी आवाज़ बुलंद की थी। अगर नियम विरुद्ध नियुक्तियां दी गयी है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शामिल अधिकारियों पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
जब इस पूरे मामले में वर्तमान अधिशाषी अधिकारी व तहसीलदार श्रीवर्धन शर्मा से मोबाइल पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कॉल नहीं उठाया।










