The Khabar Xpress 14 अगस्त 2025। शिक्षा विभाग की मान्यता के बिना चलने वाले निजी विद्यालयों की शिकायतें मिलती ही रहती है। लेकिन अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन हो रहा है। साल दर साल ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ती रहती है, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी खामोश रहते हैं। कहीं एक कमरे में तो कहीं बिना मापदंड की बिल्डिंग में विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इसमें प्राथमिक स्तर के विद्यालयों की संख्या सबसे अधिक है। शिक्षा सत्र शुरू होते ही शहर से लेकर गांव तक नए स्कूल खोलने की होड़ लग जाती है। लोग मानक, मान्यता की परवाह किए बिना मकानों, दुकानों से लेकर झोपड़ियों तक में स्कूल चलाने लगते हैं। कम पढ़े लिखे बेरोजगार युवकों को बेहद ही कम पारिश्रमिक पर शिक्षक के रूप में तैनात कर देते हैं। इतना ही नहीं कोचिंग का रजिस्ट्रेशन करवा कर भी लोग स्कूल चला रहे हैं। हर साल शिक्षा विभाग की ओर से अभियान चलाकर बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद कराने की बात तो कही जाती है। इसके बाद भी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या कम होने के बजाए बढ़ती रहती है। इससे विभागीय कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
सूत्रों के अनुसार श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में भी ऐसे विद्यालय चलाये जा रहे है। ऐसे स्कूलों के पास न तो समुचित भवन है और न ही कोई मानक। ऐसे में तो इन विद्यालय संचालकों द्वारा अभिभावकों को अंधेरे में रखकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत अनिवार्य है। शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों की पहचान करने और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से ऐसे विद्यालय बेधड़क चल रहे है।
श्रीडूंगरगढ़ सीबीईओ सरोज पुनिया से क्षेत्र में चल रहे बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जांच करवाकर ऐसे विद्यालयों का सर्वे कर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।










