The Khabar Xpress 15 मई 2025। वाह रे मेरी जन्मभूमि। चारों तरफ प्लास्टिक मिश्रित कचरे के ढेर से सजी सड़के। कस्बे की कालू रोड़ पर तो सजावट गांव के भीतर से ही शुरू हो जाती है जो लगभग 7/8 किलोमीटर दूर तक अनवरत चलती है। उसमें चार चांद लगाते है हमारे गटर (Toilet ) सफाई वाले टैंकर, जो कहीं पर भी खाली कर देने के लिए स्वतंत्र हैं।

गायों की जगह गोचर भुमि में चरती भेंड़ बकरियों को देखकर खुद के बाल नोचने की मनःस्थिति को काबू में करके जब नगर प्रवेश पर गोचर में अन्धाधुंध कब्जे देखते हैं तो पुरखों की गालियां आकाशवाणी की तरह गूंजती है कि हमारी संतति इतनी निकृष्ट होगी जो हमारे द्वारा छोड़ी गई गोचर को बचाने में कुछ नहीं कर रही है। तो खयाल आता है, वाह रे मेरे नगर तेरा क्या कहना ।

शहर की गलियों में गड्डे, सड़को की नालियां में कीचड़ और प्लास्टिक कचरे का मिश्रण तो देखते ही बनता है
पेड़ पौधे तो काटने के लिए ही होते हैं। उनको लगाने का लाभ क्या ? इसलिए हम श्रीडूंगरगढ़ में ऐसी कोई फालतू कोशिश नहीं करते।
हां हमारे शहर में भी कुछ पागलों को जीव सेवा, नर सेवा और ट्रोमा सेन्टर बनवाने की जिद है तो कुछ को श्री डूंगरगढ़ के यश, कीर्ति, इतिहास और महान व्यक्तित्व के बारे में लिखने का भूत सवार है।
इन लोगों को हमारे नेताओ से बहुत कुछ सीखने की जरुरत है।
शहर में पार्क और भ्रमण पथ तो होने ही नहीं चाहिये। ऐसी जगहों पर बुजुर्ग लोग भ्रमण और स्वास्थ्य लाभ के बहाने इकट्ठे होकर चुगलियां भी कर सकते हैं या कोई गिर पड़ कर हमारी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
खेल मैदान में तो बच्चे खेलने के नाम पर झगड़ा भी कर सकते हैं। इसलिए खेल मैदान तो होना ही नहीं चाहिए शहर में।
पीने का पानी अगर सबको मिलने लग जाए तो हम टैंकर वाले बेरोजगार ना हो जाएंगे, तो सबकी रोजी रोटी का खयाल तो हमारे नेता ही रखेंगे। इसमें कोई नाराज हो तो होता रहे।

शहर में जितनी बड़ी हॉस्पिटल उतनी ज्यादा बीमारियां। मरीज तो बहुत बड़ी आफत है सा ल, कौन सेवा करे, इसलिए अस्पताल छोटा ही होना चाहिए।
भू माफिया यदि गोचर पर कब्जा करते हैं तो वह उनकी हिम्मत है। हमारी ज़मीन तो नहीं मांगते बेचारे इसमें भी कुछ लोगों को तकलीफ़ है। बताओ
क्या कमी है हमारे शहर में जो चेतन स्वामी जैसे साहित्यकार को बार बार कुछ लिखने और मातृभूमि के लिए संकल्प लेने को कहना पड़ रहा हैं।
सर्वगुण संपन्न है मेरी माटी, मेरी धन्य धरा। पर फिर भी नमन करने को मन करता है। तेरी स्नेह भरी गोद में रहने और समा जाने की लालसा है।हम ऋणी है तेरे, हे जन्म भूमि। तेरा कर्ज नहीं उतार सकते हमें क्षमा करना।
श्रीडूंगरगढ़स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
आज श्रीडूंगरगढ़ का स्थापना दिवस है। बीकानेर के राजा थावर यानी शनिवार को स्थापना के लिए शुभ दिन मानते थे। जैसे बीकानेर शनिवार के दिन स्थापित हुआ। श्री डूंगरसिंह जी ने ज्येष्ठ कृष्णा (बदी) 3 (तृतीया), संवत 1939 के दिन शनिवार को ही श्रीडूंगरगढ़ की थापना की। उस दिन 6 मई 1882 की तारीख पड़ती थी। पर हमें अंग्रेजी तारीख को याद न रखकर जेठ कृष्णा (बदी) तृतीया को ही श्रीडूंगरगढ का स्थापना दिन मनाना चाहिए।
घनश्याम दास स्वामी, श्रीडूंगरगढ़








