The Khabar Xpress 08 अप्रैल 2025। श्रीडूंगरगढ़ के जाए जन्में श्री किसनाराम नाई के पिताश्री बस्तीराम जी भादरा ठाकुर के कामदार थे, बाद में वे नौरंगदेसर बसे और थोड़े अर्से बाद श्रीडूंगरगढ़ बस गए। पांच भाइयों में किसनाराम जी चतुर्थ नम्बर के थे। भाइयों का स्नेह मिला तो बाल्यकाल से राजनीति की ओर झुकाव हो गया। आपका जन्म 01 जनवरी 1935 को हुआ। श्रीडूंगरगढ़ के हाईस्कूल से आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त की। 18 वर्ष की उम्र आते आते राजनीति में कूद पड़े। सन 1954 में श्रीडूंगरगढ़ के तत्कालीन 10 नम्बर वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। तब नगरपालिका के दस ही वार्ड हुआ करते थे। उस समय एक वार्ड से दो दो मैम्बर होने का चलन था। प्रारंभ में आप हर बार पार्षद के रूप में खड़े हुए और जीते। 1982 में पालिका के कार्यवाहक अध्यक्ष बने और 2008 से 2013 तक पालिका के अध्यक्ष रहे। 1977 में जनता पार्टी शामिल हुए तथा 1980 मे बीजेपी में। 1989 में पहली बार बीजेपी से श्रीडूंगरगढ़ के विधायक चुने गए। इस समय श्री कुम्भाराम आर्य को लगभग 8500 मतों के अंतर से हराया। यह एक कद्दावर नेता को हराने की जीत थी, इसलिए बी बी सी लंदन से खबर प्रसारित हुई। 1993 में दूसरी बार श्री दौलतराम सारण को लगभग 13000 मतों से हरा कर विधायक बने। तीसरी दफा श्री मंगलाराम गोदारा को करीब 16200 मतों से पराजित किया। 2018 में निर्दलीय लड़े परंतु हार गए।

सेन समाज के 14 वर्षों तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। विधानसभा में आप प्राक्कलन समिति के सदस्य तथा 2013 में विधानसभा पुस्तकालय के अध्यक्ष रहे।
आपकी छवि एक दबंग राजनेता की रही है लेकिन सामान्य जन के हिमायती रहने के कारण राजनीतिक कैरियर लम्बा चला। अर्थोपार्जन के लिए एक बस को कच्चे रूट में ऑपरेट किया किंतु कुशल मैनेजमेंट के कारण एक समय आपकी बसों की संख्या 18 तक जा पहुंची। जीवन सदैव ही संघर्ष भरा रहा। नगर पर आपकी गहरी पकड़ रही।

राजस्थान के शीर्ष नेता श्री भैरोसिंह जी शेखावत के साथ सदैव आपकी निकटता रही। जुबान में मुंहफटपना आपकी शैली रही है। गलत बात पर उन्हें क्रोध आ जाया करता था, पर मन से किसी का बुरा नहीं सोचते। बीजेपी के दो बार जिलाध्यक्ष रहे। राजनीति में निर्द्वन्द्व लम्बी पारी खेली। वे इसके चतुर खिलाड़ी हो गए। कुछ माह पूर्व तक आप राजनीति में सक्रिय रहे।

आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि किसनाराम जी लगभग चालीस वर्षों से अपनी बाडी में अपने खर्चे से निरंतर 120 गायों की सेवा करते रहे। गौ सेवा के प्रति उनकी गहन दिलचस्पी रही। छोटे बच्चों से वे अत्यधिक स्नेह रखते थे। बच्चों का एक हुजूम उनके इर्द-गिर्द मंडराता रहता था। वे उनके छोटे दोस्त थे।

श्रीडूंगरगढ़ पालिका के पूर्व अध्यक्ष स्व. जीवराज नाई उनके छोटे पुत्र थे। विगत कुछ वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में उनका देहावसान हो गया था। इस मर्मांतक घटना से किसनाराम जी के हृदय पर गहरी चोट लगी, पर ईश्वरीय विधान को टाला नहीं जा सकता। किसनाराम जी सुबह- सांय परमात्मा का स्मरण करते थे।
कई दिनों की अस्वस्थता के उपरांत 7 अप्रेल 2025 की रात्रि को उनका देहावसान हो गया। श्रीडूंगरगढ की राजनीति में वे एक लम्बी पारी खेलकर गए। ईश्वर उन्हें सद्गति प्रदान करे। आमजन में नेतोजी के नाम से विख्यात रहे स्व. किसनाराम नाई के साथ ही श्रीडूंगरगढ़ की राजनीति से एक जुझारू एवं जमीनी नेता के युग का भी अवसान हो गया।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
●चेतन स्वामी









