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विश्व हेपेटाइटिस दिवस आज, डॉक्टर के बताए 8 लक्षणों से करें अपने बच्चों में हेपेटाइटिस की पहचान

Published on: July 28, 2024

The Khabar Xpress 28 जुलाई 2024। हेपेटाइटिस (Hepatitis) लिवर में होने वाली समस्या है, जिसकी वजह से इसमें सूजन होने लगती है। यह बीमारी अक्सर वायरल संक्रमण के अलावा शराब, कुछ दवाओं और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे कारकों के कारण होती है। वायरल हेपेटाइटिस के मुख्य प्रकारों में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई शामिल हैं। हालांकि, इसे लेकर आज भी कई लोगों में जागरूकता की कमी है। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से हर साल 28 जुलाई को World Hepatitis Day मनाया जाता है।

इस मौके पर आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे बच्चों में नजर आने वाले हेपेटाइटिस के कुछ प्रमुख लक्षणों के बारे में, जिन्हें भूलकर भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने श्रीडूंगरगढ़ के संजीवनी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर के.एल. शर्मा से बातचीत की।

हाईलाइट्स

  1. Hepatitis लिवर में होने वाली सूजन है, जो कई वजहों से लोगों को अपना शिकार बनाती है।
  2. इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए World Hepatitis Day मनाया जाता है।
  3. बच्चों में हेपेटाइटिस होने पर कई तरह के लक्षण नजर आते हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।

बच्चों में हेपेटाइटिस के मुख्य लक्षण

डॉक्टर बताते हैं कि हेपेटाइटिस, लिवर की सूजन, विभिन्न संकेतों और लक्षणों के जरिए नजर आती है और बच्चों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में तुरंत मेडिकल हेल्प और बेहतर परिणामों के लिए इन संकेतों को जल्दी पहचानना जरूरी है। बच्चों में हेपेटाइटिस होने पर निम्न लक्षण नजर आते हैं-

पीलिया

बच्चों में हेपेटाइटिस के प्रमुख लक्षणों में से एक पीलिया है, जिसमें त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाता है। यह रेड ब्लड सेल्स के टूटने के बायप्रोडक्ट, बिलीरुबिन को प्रोसेस करने में लिवर की असमर्थता के कारण होता है।

पेट में दर्द

हेपेटाइटिस से पीड़ित बच्चों को अक्सर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में, जहां लिवर स्थित होता है, दर्द या कोमलता का अनुभव होता है। यह समस्या लगातार या रुक-रुक कर हो सकती है।

थकान और कमजोरी

हेपेटाइटिस बच्चों में थकान और कमजोरी का कारण बन सकता है, जिससे वे असामान्य रूप से थके हुए और सामान्य से कम सक्रिय हो जाते हैं। ऐसा लिवर की पोषक तत्वों को मेटाबॉलिज्म करने और खून को डिटॉक्सीफाई करने की कम क्षमता के कारण हो सकता है।

डार्क यूरिन और पीला मल

बिलीरुबिन के एक्सक्रीशन के कारण हेपेटाइटिस से पीड़ित बच्चे की यूरिन गहरे रंग की हो सकती है। इसके विपरीत उनका मल असामान्य रूप से पीला या मिट्टी के रंग का दिखाई दे सकता है।

मतली और उल्टी

हेपेटाइटिस के कारण मतली और उल्टी जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण हो सकते हैं। ये लक्षण बच्चे की भूख कम होने और उसके बाद वजन घटने में योगदान कर सकते हैं।

बुखार

हेपेटाइटिस के साथ हल्का से मध्यम बुखार तक हो सकता है, जो लिवर की सूजन या संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया का संकेत देता है।

त्वचा में खुजली

त्वचा के नीचे बाइल सॉल्ट के निर्माण के कारण कुछ बच्चों को त्वचा में खुजली का अनुभव हो सकता है।

पेट में सूजन

गंभीर मामलों में, तरल पदार्थ जमा होने के कारण पेट में सूजन हो सकती है, जिसे ascites के रूप में जाना जाता है, जो बिगड़ा हुए लिवर फंक्शन के कारण होता है।

हेपेटाइटिस का निदान क्या है?

लक्षणों को ध्यान में रखते हुए और स्थिति की गम्भीरता के आधार पर डॉक्टर्स हेपेटाइटिस का निदान करते हैं। लीवर में सूजन, त्वचा की रंगत पीली होना, पेट में में फ्लूइड होना आदि को देखकर फिज़िकल एक्ज़ामिनेशन करने को कहते हैं। इसके लिए इन टेस्ट को करने की सलाह दी जाती है-

  • पेट का अल्ट्रासाउन्ड
  • लीवर फंक्शन टेस्ट
  • ऑटोइम्यून ब्लड मार्कर टेस्ट
  • लिवर बायोपसी

हेपेटाइटिस का उपचार क्या है?

अक्यूट हेपेटाइटिस कुछ हफ्ते में कम होने लगते हैं और मरीज़ को आराम मिलने लगता है। जबकि,  क्रोनिक हेपेटाइटिस के लिए दवाई लेने की ज़रूरत होती है। लीवर खराब हो जाने पर लीवर ट्रांसप्लैनटेशन भी एक विकल्प है।

हेपेटाइटिस से बचाव क्या हैं?

हेपेटाइटिस बी और सी की रोकथाम वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के प्रयाल करने से हो सकता है।  इसके अलावा बच्चों को हेपेटाइटिस से सुरक्षित रखने के लिए लिए वैक्सीन्स दी जा सकती हैं। सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन [ Center for Disease Control and Prevention (CDC)] के अनुसार 18 साल के उम्र तक और उससे वयस्क लोगों को 6-12 महीने में 3 डोज़ दी जानी चाहिए। इस तरह उन्हें ,हेपेटाइटिस से पूर्ण सुरक्षा मिलेगी। साथ ही इन बातों का ख्याल रखें-

  • अपना रेजर, टूथब्रश और सूई को किसी से शेयर न करें, इससे इन्फेक्शन का खतरा कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
  •  टैटू करवाते समय सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें ।
  •  कान में छेद करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि उपकरण सुरक्षित और इंफेक्शन-फ्री हैं।

Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य ले लें। The Khabar Xpress की ओर से कोई जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है। 

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