The Khabar Xpress 07 अप्रेल 2026 श्रीडूंगरगढ़। पूर्व विधायक नेतोजी के नाम से विख्यात सच्चे जननेता स्व. किशनाराम नाई की पहली बरसी पर आज मंगलवार को नेतोजी की बाड़ी (केआर फार्म हाउस) में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रखा गया। स्वर्गीय किशनाराम नाई मेमोरियल ट्रस्ट एवं उनके समर्थकों की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों के साथ साथ ज़िले भर से नेता एवं जनप्रतिनिधि पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओ एवं जनप्रतिनिधियों ने उनके साथ के संस्मरण साझा कर उनको याद किया। स्व. किशनाराम नाई को सच्चा जननेता बताया जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सादगी से जीया। इसके अलावा नोहर, भादरा, हनुमानगढ़, बीकानेर, गंगाशहर, नोखा, शाहपुरा, अजमेर, केकड़ी एवं जयपुर में भी अपने नेता को श्रद्धा सुमन अर्पित किये गए।

श्रद्धांजलि सभा मे ये रहे शामिल
ओबीसी मोर्चा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चंपालाल गेदर, बीकानेर सांसद प्रतिनिधि रविशेखर मेघवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया, जिला महामंत्री दिलीपसिंह राजपुरोहित, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया, प्रधान प्रतिनिधि केसराराम गोदारा, भाजपा ओबीसी मोर्चा देहात जिलाध्यक्ष विनोदगिरी गुसाईं, भाजपा नेता महावीर चारण धनेरू सरपंच मोहन स्वामी, तोलाराम जाखड़, मोमासर सरपंच जुगराज संचेती, कुम्भाराम सिद्ध, युवा कांग्रेसी नेता राजेन्द्र मेघवाल बापेऊ, विमल भाटी, एडवोकेट चंद्रप्रकाश बारूपाल, रामदेव बोहरा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रामेश्वर पारीक एवं मानमल शर्मा, श्यामसुंदर आर्य, श्यामसुंदर पारीक, पंडित गोपाल शास्त्री व्यास, भाजपा देहात मंत्री भरत सुथार, शिवरतन नाई नोसरिया, सुभाष पुनिया, सेन समाज अध्यक्ष ओमप्रकाश सेन, कमल नाई, के के जांगिड़, किशनसिंह राजपुरोहित, किशोर मारू सहित क्षेत्र से अनेक जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।

स्व. किशनाराम नाई के पुत्र मदनलाल नाई, पौत्र आशीष, नितिन, प्रशांत, दीपांशु, रामधन नाई, पड़पोत्र करण, प्रिंस, नाती सुरेंद्र मारू (सहायक निदेशक कृषि विभाग), रोबिन, दिनेश दिनोदिया, बजरंग जाड़ीवाल, मूलचंद जाड़ीवाल सहित सभी पारवारिक सदस्य मौजूद रहे।

संघर्षों की दास्तां है नेतोजी का जीवन
श्रीडूंगरगढ़ के जाए जन्में स्व. किसनाराम नाई के पिताश्री बस्तीराम जी भादरा ठाकुर के कामदार थे, बाद में वे नौरंगदेसर बसे और थोड़े अर्से बाद श्रीडूंगरगढ़ बस गए। पांच भाइयों में किसनाराम जी चतुर्थ नम्बर के थे। भाइयों का स्नेह मिला तो बाल्यकाल से राजनीति की ओर झुकाव हो गया। आपका जन्म 01 जनवरी 1935 को हुआ। श्रीडूंगरगढ़ के हाईस्कूल से आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त की। 18 वर्ष की उम्र आते आते राजनीति में कूद पड़े। सन 1954 में श्रीडूंगरगढ़ के तत्कालीन 10 नम्बर वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। तब नगरपालिका के दस ही वार्ड हुआ करते थे। उस समय एक वार्ड से दो दो मैम्बर होने का चलन था। प्रारंभ में आप हर बार पार्षद के रूप में खड़े हुए और जीते। 1982 में पालिका के कार्यवाहक अध्यक्ष बने और 2010 से 2013 तक पालिका के अध्यक्ष रहे। 1977 में जनता पार्टी शामिल हुए तथा 1980 मे बीजेपी में। 1989 में पहली बार बीजेपी से श्रीडूंगरगढ़ के विधायक चुने गए। इस समय श्री कुम्भाराम आर्य को लगभग 8500 मतों के अंतर से हराया। यह एक कद्दावर नेता को हराने की जीत थी, इसलिए बी बी सी लंदन से खबर प्रसारित हुई। 1993 में दूसरी बार श्री दौलतराम सारण को लगभग 13000 मतों से हरा कर विधायक बने। तीसरी दफा श्री मंगलाराम गोदारा को करीब 16200 मतों से पराजित किया। 2018 में निर्दलीय लड़े परंतु हार गए।
सेन समाज के 14 वर्षों तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। विधानसभा में आप प्राक्कलन समिति के सदस्य तथा 2013 में विधानसभा पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष रहे।
आपकी छवि एक दबंग राजनेता की रही है लेकिन सामान्य जन के हिमायती रहने के कारण राजनीतिक कैरियर लम्बा चला। अर्थोपार्जन के लिए एक बस को कच्चे रूट में ऑपरेट किया किंतु कुशल मैनेजमेंट के कारण एक समय आपकी बसों की संख्या 18 तक जा पहुंची। जीवन सदैव ही संघर्ष भरा रहा। नगर पर आपकी गहरी पकड़ रही।
राजस्थान के शीर्ष नेता पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भैरोसिंह शेखावत के साथ सदैव आपकी निकटता रही। जुबान में मुंहफटपना आपकी शैली रही है। गलत बात पर उन्हें क्रोध आ जाया करता था, पर मन से किसी का बुरा नहीं सोचते। बीजेपी के चार बार जिलाध्यक्ष रहे। जब श्रीडूंगरगढ़ चूरू जिले का हिस्सा था तब भी जिलाध्यक्ष रहे और बाद में बीकानेर जिले में शामिल होने के बाद भी जिलाध्यक्ष का पदभार इन्होंने संभाला था। राजनीति में निर्द्वन्द्व लम्बी पारी खेली। वे इसके चतुर खिलाड़ी हो गए। कुछ माह पूर्व तक आप राजनीति में सक्रिय रहे।
गौप्रेमी एवं पशु प्रेमी थे नेतोजी
स्व. किसनाराम जी लगभग चालीस वर्षों से अपनी बाडी में अपने खर्चे से निरंतर 120 गायों की सेवा करते रहे। गौ सेवा के प्रति उनकी गहन दिलचस्पी रही। छोटे बच्चों से वे अत्यधिक स्नेह रखते थे। बच्चों का एक हुजूम उनके इर्द-गिर्द मंडराता रहता था। वे उनके छोटे दोस्त थे। कहा जाता है कि जहां भी जाते अपने साथ अबोल जानवरों के लिए भोजन लेकर जाते थे।

श्रीडूंगरगढ़ पालिका के पूर्व अध्यक्ष स्व. जीवराज नाई उनके छोटे पुत्र थे। विगत कुछ वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में उनका देहावसान हो गया था। इस मर्मांतक घटना से उनके हृदय पर गहरी चोट लगी, पर ईश्वरीय विधान को टाला नहीं जा सकता। स्व. किशनाराम नाई सुबह- सांय परमात्मा का स्मरण करते थे।
कई दिनों की अस्वस्थता के उपरांत 7 अप्रेल 2025 की रात्रि को उनका देहावसान हो गया। श्रीडूंगरगढ की राजनीति में वे एक लम्बी पारी खेलकर गए। ईश्वर उन्हें सद्गति प्रदान करे। आमजन में नेतोजी के नाम से विख्यात रहे स्व. किशनाराम नाई के साथ ही श्रीडूंगरगढ़ की राजनीति से एक जुझारू एवं जमीनी नेता के युग का भी अवसान हो गया।











