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“दीक्षा कल्याण महोत्सव” समापन समारोह आज सम्पन्न, आचार्यश्री महाश्रमण के आदर्श और शिक्षा प्रेरणास्पद

Published on: May 22, 2024

The Khabar Xpress 22 मई 2024। आज श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, श्रीडूंगरगढ़ की ओर से मालूभवन में शासनश्री साध्वी कुंथूश्री जी के सान्निध्य में तेरापंथ के ग्यारहवें आचार्य श्री महाश्रमणजी की दीक्षा के पांच दशक पूरे होने पर दीक्षा कल्याण महोत्सव मनाया गया। स्थानीय विधायक श्री ताराचंदजी सारस्वत तथा विश्वकर्मा कौशल बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामगोपाल जी सुथार के मुख्य एवं विशिष्ट आतिथ्य में नगर के जैन एवं जैनेतर गणमान्य जनों की सुन्दर उपस्थिति रही।

जन्म और जीवन दो बिंदु है। जन्म से भी जीवन का महत्व ज्यादा होता है इसे हमें स्वीकार करना होगा। जिनके दोनों ही श्रेष्ठ होते हैं, वे अति पुण्यशाली होते हैं। आचार्य श्री महाश्रमण जी का जीवन हमारे लिए एक उदाहरण है। जिन्होंने बाल्यावस्था में जैन भागवती दीक्षा लेकर अपने आपको अहिंसा, संयम एवं तपमय बना लिया। – शासनश्री साध्वी कुंथूश्री जी

मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ चेतन स्वामी ने कहा कि महाश्रमणजी में श्रेष्ठ आचार्य के सभी गुण तो है ही, परन्तु वे श्रेष्ठ शासनकर्ता भी उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ को बहुत ऊंचाई तक पहुंचाया है। वे बौद्धिक होने के साथ दीर्घ तपस्वी भी हैं। डाॅ स्वामी ने जोर देकर कहा कि जिन जातियों सम्प्रदायों के पास गुरु हैं, उन जातियों के लोग भौतिक और अभौतिक दोनों तरह की उन्नति का वरण कर रहे हैं। गुरु विहिन जातियां विभिन्न तरह के कालगत संक्रमणों से बच नहीं सकती। डाक्टर स्वामी ने अपना वक्तव्य मीठी राजस्थानी भाषा में दिया, उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा पर तेरापंथ के आदि आचार्य भीखणजी स्वामी का बहुत बड़ा उपकार है। उन्होंने राजस्थानी में 38 हजार पदों की रचना की। जयाचार्यजी से लेकर आचार्य श्री तुलसी तक के आचार्यों ने राजस्थानी में रचना कर जनभाषा का मान बढाया।

श्रीडूंगरगढ़विधायक ताराचन्द सारस्वत ने कहा कि आचार्यश्री ने युवाओं को नशामुक्ति का सन्देश दिया था। आज युवाओं को उनके आदर्श और शिक्षाओं को आत्मसात करना चाहिये।

राजस्थान सरकार में श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार ने कहा कि आचार्यश्री ने सर्वधर्म समभाव की शिक्षा दी। उन्होंने जैन धर्म के साथ सनातन धर्म पर समान रूप से अपनी शिक्षाओं को आमजन के समक्ष रखा।

आचार्यश्री महाश्रमणजी ने जन जन को संस्कारित किया। दीक्षा दिवस को दूसरा जन्मदिवस माना जाता है। – श्रीमती उमा मित्तल, उपखण्ड अधिकारी, श्रीडूंगरगढ़

कार्यक्रम का मंच संचालन पवन सेठिया ने किया। इस समारोह में तहसीलदार राजवीर कड़वासरा, श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति प्रधान सावित्री देवी गोदारा, नगरपालिका नेता प्रतिपक्ष श्रीमती अंजू पारख, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष रेखा भादानी, साहित्यकार श्याम महर्षि, साहित्यकार मदन सैनी, विमल भाटी, शिवप्रसाद तावणियाँ, सत्यनारायण स्वामी, तुलसीराम चोरडिया, लीलाधर बोथरा, हेमराज भादानी, संजय शर्मा सहित कस्बे के गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक मनोज पारख ने आये हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

गुरुदेव तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जी के युगीन चिंतन ने जन-जन को प्रभावित किया, जैन-अजैन सभी श्रद्धालु बनें। यह सब आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनें दोनों गुरुओं की छत्र छाया में रहकर देखते ही नहीं रहे बल्कि इसको और व्यापक कैसे बनाया जा सकता है उस पर गहराई से चिंतन मंथन करते रहते थे।

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