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बदलते मौसम में बढ़ रहा है चार तरह के बुखार का बढ़ रहा खतरा, एक्सपर्ट से जाने कारण, दो दिन है फीवर तो जरूर करा लें ये टेस्ट

Published on: October 19, 2024

The Khabar Xpress 19 अक्टूबर 2024। बदलते मौसम में कई तरह के वायरस एक्टिव हो जाते हैं जो बीमारियों का कारण बनते हैं. इस समय डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार और चिकनगुनिया के केस सामने आ रहे हैं. अस्पतालों में बुखार के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बीते कुछ सप्ताह से बढ़ गई है. इन सभी मरीजों की जांच जा रही है. इनमें कुछ लोगों में वायरल बुखार तो कुछ में डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू के केस भी मिल रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस समय बुखार है और दो दिन से ज्यादा समय तक बना हुआ है तो लापरवाही न करें और अपनी जांच करा लें.

एक्सपर्ट के मुताबिक, डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार और स्वाइन फ्लू के कई लक्षण एक जैसे हैं. बुखार, खांसी-जुकाम, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द इन बुखार के सामान्य लक्षण हैं. ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है की किस बीमारी का संक्रमण हुआ है. इसकी पहचान का सबसे सही तरीका यही है की बुखार होने पर टेस्ट जरूर करा लें.

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बुखार होने पर कौन से टेस्ट कराएं?

श्रीडूंगरगढ़ के संजीवनी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ के.एल. शर्मा बताते हैं कि सितंबर और महीने में डेंगू के मामले बढ़ने लगते हैं. इस दौरान मलेरिया के केस भी सामने आते हैं. ये दोनों बीमारी मच्छर के काटने से होती है और अगर समय पर इलाज न हो तो ये खतरनाक हो सकती है. डेंगू और मलेरिया दोनों में ही बुखार होता है, हालांकि मलेरिया में हल्की ठंड भी लगती है. डेंगू में शरीर पर दाने निकल सकते हैं और मांसपेशियों में गंभीर दर्द होता है. अगर इस मौसम में आपको दो दिन से अधिक समय तक बुखार हुआ है तो डेंगू और मलेरिया दोनों की जांच करा लें.

डेंगू की जांच कैसे करे..?

डेंगू की जांच के लिए एनएस1 एलिसा टेस्ट कराया जाता है. बुखार दिखने के 0 से सात दिन के भीतर ये टेस्ट करा लेना चाहिए. इस टेस्ट में एंटीजन और एंटीबॉडी की जानकारी मिलती है. अगर यह टेस्ट पॉज़िटिव आता है, तो इसका मतलब है कि व्यक्ति को डेंगू है. इसके अलावा डेंगू की जांच के लिए पीसीआर टेस्ट कराया जाता है. इस टेस्ट से शरीर में डेंगू वायरस की पहचान की जाती है. इन दोनों टेस्ट के परिणाम एक दिन में आ जाते हैं.

मलेरिया के प्रकार

मलेरिया परजीवी के पाँच ज्ञात प्रकार हैं: प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम, प्लास्मोडियम विवैक्स, प्लास्मोडियम ओवले, प्लास्मोडियम मलेरिया और प्लास्मोडियम नोलेसी। सबसे गंभीर पी. फाल्सीपेरम है और सबसे कम आम पी. नोलेसी है।

मलेरिया की जांच के लिए टेस्ट

मलेरिया की जांच के लिए ये टेस्ट कराए जा सकते हैं. इसमें पहले मलेरिया एंटीजन टेस्ट कराया जाता है. इसमें शरीर में मलेरिया के वायरस की पहचान होती है. इसके अलावा बल्ड स्मीयर माइक्रोस्कोपीक टेस्ट होता है. इस टेस्ट से मरीज़ के शरीर में से ब्लड का एक छोटा सा सैंपल लिया जाता है. इस सैंपल की माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है. इसमें पता चलता है कि ब्लड में मलेरिया का वायरस है या नहीं है. मलेरिया की जांच के लिए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट भी किया जाता है. यह टेस्ट 15 मिनट से कम समय में नतीजे दे सकता है, लेकिन इसमें यह पता नहीं चलता है कि किस तरह का मलेरिया का संक्रमण है. इन टेस्ट से प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम और प्लास्मोडियम विवेक्स की जानकारी तुरंत हो जाती है।

स्वाइन फ्लू के लिए टेस्ट

स्वाइन फ्लू के केस डेंगू और मलेरिया की तुलना में कम आते हैं, लेकिन इस मौसम में स्वाइन फ्लू के मामले रिपोर्ट किए जाते हैं. इसके लक्षण भी बुखार, खांसी-जुकाम, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसे होते हैं. स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नाक या गले से स्वाब लिया जाता है. फिर आरटीपीसीआर के जरिए टेस्ट किया जाता है.

वायरल बुखार के लिए टेस्ट

वायरल बुखार की जांच के लिए वायरल मार्कर टेस्ट किया जाता है. इससे पता चलता है कि शरीर में वायरस बुखार किस लेवल का है. अगर लेवल ज्यादा है तो उसके हिसाब से दवाएं दी जाती है.

Disclaimer: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर की राय अवश्य ले लें। The Khabar Xpress की ओर से कोई जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है। 

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