एजुकेशन टेक्नोलॉजी एग्रीकल्चर ऐस्ट्रो ऑटो खेल ट्रेंडिंग धर्म बिजनेस मनोरंजन मूवी रिव्यू रिजल्ट लाइफस्टाइल विशेष

भरत ओळा को चुन्नीलाल सोमानी राजस्थानी कथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया

Published on: November 26, 2023

द खबर एक्सप्रेस 26 नवम्बर 2023। चुन्नीलाल सोमानी राजस्थानी कथा पुरस्कार समारोह के अवसर पर राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डाॅ दुलाराम सारण ने कहा कि अकादमियां लेखकों को सम्मान तो दे सकती है, किंतु लेखकों को तैयार करने में अपना कोई अधिक योगदान नहीं दे सकती। यह काम साहित्यिक संस्थाएं अधिक गंभीरता से कर सकती हैं। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि राजस्थानी भाषा मान्यता प्रयास के ये आखरी वर्ष हैं। यह आखरी पीढ़ी चल रही है, जिसके मन में मातृभाषा का दर्द है। अगली पीढ़ी तो भाषा को भूल चुकी होगी। जन आंदोलन को अब सरकारें तवज्जो नहीं देती। राजस्थानी की मान्यता के लिए तो अब नई रणनीति अपनाने की जरूरत है।

चतुर्थ चुन्नीलाल सोमानी राजस्थानी कथा पुरस्कार डाॅ भरत ओळा के उपन्यास “नाॅट रिचेबल” पर प्रदान किया गया। उन्हें पुरस्कार स्वरूप इकतीस हजार रुपये की राशि, शाॅल, श्रीफल भेंट किए गए। पुरस्कार समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कवि कथाकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि लेखक सहस्र आंखों वाला होना चाहिए। उसका रचा इतना विश्वसनीय हो कि हर पाठक को वह अपना सा लगे और सत्य प्रतीत हो। भरत ओळा की खासियत है कि उनकी हर कृति बेहद पठनीय होती है।

समारोह के प्रारंभ में पुरस्कार प्रायोजक उद्योगपति लक्ष्मी नारायण सोमानी ने कहा कि भाषा से संस्कृति जुड़ी हुई है, भाषा को नहीं रखोगे तो हजारों वर्षों से संरक्षित हमारी सांस्कृतिक धरोहर चली जाएगी। भाषा हमारे आनंदमय जीवन की धुरी है।
अध्यक्षीय वक्तव्य के द्वारा राजस्थानी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्याम महर्षि ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता का प्रश्न हमारी केन्द्र और राज्य सरकार की इच्छा शक्ति पर टिका हुआ है। सरकारें चाहे तो यह चुटकियों का खेल है। उन्होंने इस बात पर अधिक जोर दिया कि राजस्थानी हमारे घरों से न जाए।
पुरस्कार प्राप्तकर्ता डाॅ भरत ओळा ने कहा कि राजस्थानी लेखक दो तीन मोर्चों पर अपनी लड़ाई लड़ता है। एक ओर वह भाषा के लिए आंदोलन करता है दूसरी ओर उसके सामने बड़ी चुनौती अपने लिखे को पाठकों तक पहुंचाने की है। राजस्थानी भाषा के कार्यों को राजस्थानी उद्योगपति अपना अर्थ सहयोग देकर सुगम बना सकते हैं।
पुरस्कार समारोह में डाॅ चेतन स्वामी, शंकरसिंह राजपुरोहित,पर्यावरणविद् ताराचंद इन्दौरिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डाॅ चेतन स्वामी ने किया।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

पढ़ना न भूलें

निकाय चुनाव में श्रीडूंगरगढ़ में भाजपा के लिए बज रही खतरे की घंटी या सिर्फ चुनावी शोर ?

फिर बाहर आया ट्रॉमा सेंटर का जिन्न, 655 दिनों का धरना, राजनीतिक दल मैदान में, सोशल मीडिया पर मांग, पंचायत व निकाय चुनाव सामने

राजस्थान के 11 विश्वविद्यालयों में खुलेंगे ‘राजस्थानी भाषा’ अध्ययन केंद्र, राज्यपाल ने जारी किए निर्देश

समाजसेवा की नई मिसाल: मोहता परिवार करेगा मोहता पैलेस का विस्तार, जनहित में बनेगा सेकेंड फ्लोर

सरकारी आदेशो की खुली अवहेलना, पार्किंग में बिक रही सब्जियां, प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी या ठेकेदार की अवैध हफ्ता वसूली

बीकानेर–सीकर NH-11 को फोरलेन बनाने की मांग तेज, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार ने भेजा पत्र

Leave a Comment