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क्यों है वसुंधरा राजे सिंधिया सब पर भारी…? गजेन्द्र सिंह शेखावत पिछड़े, पढ़े इनसाइड स्टोरी

Published on: December 11, 2023

द खबर एक्सप्रेस 11 दिसंबर 2023। राजस्थान विधानसभा के चुनाव परिणाम आये हुए एक सप्ताह हो गया है। राजस्थान में नए सीएम के लिए फिलहाल इंतजार करना होगा। माना जा रहा है कि विधायक दल की बैठक कल मंगलवार को होगी। पार्टी पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह, सरोज पांड़े और विनोद तावड़े के आज जयपुर आने की संभावना है। सीएम रेस में आधा दर्जन नाम शामिल है। इनमें से कुछ नाम काफी पीछे रह गए है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दीया कुमारी और किरोड़ी लाल मीणा रेस में पिछड़ते हुए दिखाई दे रहे है। वजह यह है कि इन नेताओं के पक्ष में एक भी विधायक नहीं बोल रहा है।

40-50 विधायकों का समर्थन वसुंधरा राजे को

हालांकि, सियासी जानकारों का कहना है कि विधायकों का समर्थन उसी नेता को मिलता है जिसे आलाकमान पसंद करता है। इसलिए यह मायने नहीं रखता है कि विधायक किसे समर्थन देने की बात कह रहे हैं। पीएम मोदी चौंकाने वाले फैसलों के लिए जाने जाते हैं। दूसरी तरफ पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को बीजेपी ने सीएम फेस घोषित नहीं किया है। फिर भी वह सब पर भारी पड़ रही है। 40-50 विधायकों का समर्थन वसुंधरा राजे को है। क्योंकि राजे के आवास पर इतनी संख्या में विधायक पहुंचे है। जबकि सीएम रेस में शामिल नेताओं के यहां एक भी विधायक नहीं पहुंचा। सियासी जानकार इसके यही मायने निकाल रहे है कि वह रेस से बाहर हो चुके है। महंत बालकनाथ ने ट्वीट कर इसके संकेत भी दे दिया है कि वह सीएम रेस में शामिल नहीं है।

शेखावत और दीया कुमारी क्यों पिछड़ रहे हैं…?

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने किसी को सीएम फेस घोषित नहीं किया था। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बार- बार कहते रहे हैं कि संसदीय बोर्ड ही सीएम का फैसला करेगा। लेकिन अभी तक बोर्ड कोई फैसला नहीं कर पाया है। सियासी जानकारों का कहना है कि गजेंद्र सिंह शेखावत बड़े नेता है। अशोक गहलोत को उनके गृह जिले जोधपुर में हराया है। सीएम बनने की सभी काबिलियत है। इसके बावजूद वसुंधरा राजे पर भारी नहीं पड़ रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि बीजेपी आलाकमान के लिए वसुंधरा राजे को इग्नोर करना कठिन हो रहा है। क्योंकि राजस्थान में वसुंधरा राजे जैसा मजबूत चेहरा बीजेपी के पास नहीं है।

शेखावत मजबूत दावेदार के तौर पर उभरे थे

चुनाव से करीब पांच महीने पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मजबूत दावेदार के तौर पर उभरे थे। लेकिन बड़ा सवाल यह है सीएम रेस में क्यों पिछड़ते दिखाई दे रहे है। केंद्रीय मंत्री शेखावत की टिकट वितरण में खासी भूमिका रही थी। लेकिन उनके समर्थन में कोई विधायक खुलकर नहीं बोल रहा है। शेखावत के गृह जिले जोधपुर में बीजेपी को इस बार बंपर जीत मिली है। इसके बावजूद जोधपुर के अधिकांश विधायक वसुंधरा राजे को सीएम बनाने की मांग कर रहे है। शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ राजे के बंगले पर भी गए। सियासी जानकारों का कहना है कि गजेंद्र सिंह शेखावत पर संजीवनी घोटाला के आरोप लगे है। यहीं वजह है कि रेस में पिछड़ रहे है। सीएम पद की दूसरी बड़ी दावेदार दीया कुमारी जयपुर राजघराने से आतीं है। लेकिन इसके बावजूद वसुंधरा राजे के मुकाबले पिछड़ रही है। चर्चा है कि दीया कुमारी को विधायक पसंद नहीं कर रहे है।

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