द खबर एक्सप्रेस 17 सितंबर 2023। आज विश्वकर्मा जयंती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर बीकानेर में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य अतिथि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया सिंह पटेल होंगी। इस अवसर पर विधायक बीकानेर पूर्व सुश्री सिद्धि कुमारी भी मौजूद रहेंगी।
क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना….?
पीएम विश्वकर्मा पारंपरिक कौशल वाले लोगों का समर्थन करने वाली योजना है। इस योजना के तहत उदार शर्तों पर तीन लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इस योजना के शुरू होने से देशभर के करीब 30 लाख विश्वकर्मा परिवारों को फायदा मिल सकता है।
इसके जरिए पारंपरिक शिल्प में लगे लोगों को सहायता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित होगा। सरकार की मानें तो यह फोकस न केवल कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने बल्कि स्थानीय उत्पादों, कला और शिल्प के माध्यम से सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और विविध विरासत को जीवित और समृद्ध बनाए रखने की इच्छा से भी प्रेरित है।
योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
पीएम विश्वकर्मा को 13,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित किया जाएगा। इस योजना के तहत, बायोमेट्रिक आधारित पीएम विश्वकर्मा पोर्टल का उपयोग करके सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से विश्वकर्माओं का निशुल्क पंजीकरण किया जाएगा। उन्हें पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान-पत्र, मूलभूत और उन्नत प्रशिक्षण से जुड़े कौशल उन्नयन, 15,000 रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन, पांच प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर एक लाख रुपये (पहली किश्त) और दो लाख रुपये (दूसरी किश्त) तक मुक्त ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा या अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले विश्वकर्माओं द्वारा पारंपरिक कौशल के परिवार-आधारित प्रथा को सुदृढ़ बनाना और पोषित करना है। पीएम विश्वकर्मा का मुख्य फोकस कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत हों।
इससे किस वर्ग को लाभ मिलेगा?
यह योजना पूरे भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करेगी। पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत अठारह पारंपरिक शिल्पों को शामिल किया जाएगा। इनमें ये लोग शामिल हैं:
(i) बढ़ई
(ii) नौका निर्माता
(iii) शस्त्रसाज
(iv) लोहार
(v) हथौड़ा और टूल किट निर्माता
(vi) ताला बनाने वाले
(vii) सुनार
(viii) कुम्हार
(ix) मूर्तिकार, पत्थर तोड़ने वाले
(x) मोची (जूता कारीगर)
(xi) राजमिस्त्री
(xii) टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर
(xiii) गुड़िया और खिलौना निर्माता (पारंपरिक)
(xiv) नाई
(xv) माला बनाने वाले
(xvi) धोबी
(xvii) दर्जी
(xviii) मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले










