The Khabar Xpress 05 अगस्त 2026, श्रीडूंगरगढ़। ट्रॉमा सेंटर निर्माण, उपजिला अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार तथा बीकानेर-सीकर फोरलेन सड़क निर्माण की मांग को लेकर उपखंड कार्यालय के सामने बुधवार को आयोजित विशाल धरना सुबह करीब 12 बजे से शाम करीब 7:30 बजे तक लगातार जारी रहा। दिनभर चले इस आंदोलन के दौरान धरनार्थियों और प्रशासन के बीच तीसरे दौर की वार्ता हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मांगों पर आंशिक सहमति बन गई।
वार्ता के दौरान प्रशासन ने धरनार्थियों को भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक ट्रॉमा व्यवस्था की जाएगी। साथ ही उपजिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से अतिरिक्त डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
वार्ता में लंबे समय से खराब पड़ी सोनोग्राफी मशीन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि मशीन को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाएगा और यदि मरम्मत संभव नहीं हुई तो उसे नई मशीन से बदल दिया जाएगा, ताकि मरीजों को जांच के लिए अन्यत्र रुख नहीं करना पड़े।

धरनार्थियों की प्रमुख मांग बीकानेर-सीकर फोरलेन सड़क को लेकर भी उपखण्ड अधिकारी शुभम शर्मा ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए संबंधित विभाग से सर्वे करवाने का आश्वासन दिया। इससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगी है।
वार्ता में उपखंड अधिकारी शुभम शर्मा, श्रीडूंगरगढ़ पुलिस वृत्ताधिकारी निकेत पारीक, थाना अधिकारी कश्यपसिंह राघव, तहसीलदार श्रीवर्धन शर्मा, चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राहुल हर्ष तथा डिप्टी सीएमएचओ योगेंद्र तनेजा मौजूद रहे। अधिकारियों ने धरनार्थियों की सभी मांगों को विस्तार से सुना और चरणबद्ध समाधान का भरोसा दिया।
दिनभर चले धरने में बड़ी संख्या में आमजन, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार धरनास्थल पर करीब 1200 से 1500 लोगों की उपस्थिति का अनुमान लगाया गया। वहीं मौके पर मौजूद कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी भीड़ को संतोषजनक और अपेक्षा से अधिक बताया।

धरना समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा कुछ मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया है, लेकिन जब तक ट्रॉमा सेंटर निर्माण और फोरलेन सड़क परियोजना सहित प्रमुख मांगों पर ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन की आगामी रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन के आश्वासनों को अमल में लाने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।









