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श्रीडूंगरगढ़ का सब्र टूटा: अब सड़कों पर जनता, कटघरे में सत्ता, ट्रॉमा सेंटर की मांग बनी जनआंदोलन, आज उपखंड कार्यालय के पास जुटेंगे विभिन्न संगठन व आम नागरिक, हिंदू संगठनों का इस्तीफा भी बना बड़ा सवाल

Published on: August 5, 2026

The Khabar Xpress 05 अगस्त 2026, श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर का मुद्दा अब केवल एक अधूरी सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि जनता के धैर्य की अंतिम परीक्षा बन चुका है। वर्षों से किए जा रहे वादे, बार-बार दिए गए आश्वासन और लगातार टलते फैसलों के बीच अब जनता ने साफ संकेत दे दिया है कि वह और इंतजार करने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि आज उपखंड कार्यालय के पास विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और जनसंगठन तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक ट्रॉमा सेंटर निर्माण की मांग को लेकर धरने पर जुट रहे हैं।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक संगठन या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब श्रीडूंगरगढ़ के सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाओं और जनता के अधिकारों का आंदोलन बन चुका है। जिस ट्रॉमा सेंटर की घोषणा वर्षों पहले हुई थी, वह आज भी कागजों में ही सिमटा हुआ है, जबकि क्षेत्र की जनता दुर्घटनाओं के समय समय पर उपचार के अभाव का दर्द लगातार झेल रही है। 650 दिनों से ज्यादा समय से धरने पर बैठे राजेन्द्र स्वामी ने बताया कि आज के सार्वजनिक धरने पर श्रीडूंगरगढ़ की आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति, पूर्व विधायक गिरधारी लाल महिया, विमल भाटी, डॉ विवेक माचरा सहित अनेक सामाजिक संगठनों एवं क्षेत्र के गणमान्यजन उपस्थित रहेंगे जो सरकारी उदासीनता के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

इन सबके बीच बड़ा घटनाक्रम भी घटा है। ट्रॉमा सेंटर के लिए नगरपालिका द्वारा आरक्षित पट्टे की भी जगह बदलने की आशंका के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की श्रीडूंगरगढ़ इकाई की समस्त कार्यकारिणी तथा जिला पदाधिकारियों द्वारा सामूहिक इस्तीफा दिया जाना इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम देता है। आमतौर पर धार्मिक-सामाजिक संगठन इस प्रकार का कठोर कदम तभी उठाते हैं, जब उन्हें लगता है कि जनहित की मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला भाजपा के लिए चुनौती बनता जा रहा है। वर्तमान में श्रीडूंगरगढ़ से भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत हैं। विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि घोषणा होने के बावजूद ट्रॉमा सेंटर निर्माण को लेकर अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई और जनता को अब तक ठोस परिणाम क्यों नहीं मिले। ऐसे में जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही की मांग स्वाभाविक रूप से और तेज हो गई है।
सबसे अहम सवाल उस आरक्षित भूमि को लेकर भी उठ रहा है, जिसे ट्रॉमा सेंटर और उपजिला अस्पताल के लिए चिन्हित माना जाता रहा है। यदि उसी भूमि पर निर्माण को लेकर असमंजस या बदलाव की स्थिति है, तो सरकार और प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अस्पष्टता ही जनाक्रोश को जन्म देती है।
आज का धरना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि सत्ता और प्रशासन के लिए चेतावनी भी है कि जनता अब घोषणाओं की राजनीति नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहती है। यदि इस बार भी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
श्रीडूंगरगढ़ की जनता का संदेश स्पष्ट है— ट्रॉमा सेंटर कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, जीवन बचाने की आवश्यकता है। अब सवाल यह नहीं कि घोषणा कब हुई थी, बल्कि यह है कि निर्माण आखिर कब शुरू होगा?

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