राजस्थान विधानसभा चुनाव : कांग्रेस-बीजेपी के लिए मुसीबत, राजस्थान चुनाव से पहले क्या दांव पर है…?

द खबर एक्सप्रेस 16 सितंबर 2023। राजस्थान में साल के अंत में चुनाव है। चुनाव से पहले कांग्रेस-बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। बीजेपी को गुटबाजी को सामना करना पड़ रहा है। जबकि गहलोत सरकार को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के लिए यह चुनाव काफी मायने रखता है। सियासी जानकारों का कहना है कि राजस्थान में हर पांच साल बाद सत्ता बदलने का ट्रेंड रहा है। इस बार ट्रेंड बरकरार नहीं रहता है बीजेपी के लिए लोकसभा चुनवा 2024 की जंग राह आसान नहीं है। बीजेपी पिछले दो लोकसभा में चुनाव में एकतरफा जीतती आ रही है सियासी जानकारों का कहना है लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं। लेकिन असर जरूर पड़ता है। जानकारों का यह भी कहना है कि सरकार रिपीट होती है तो अशोक गहलोत का राष्ट्रीय कद बढ़ जाएगा। ऐसे में सीएम गहलोत को चौथी बार सीएम बनने से रोकना मुश्किल हो जाएगा।

वसुंधरा राजे की अनदेखी

राजस्थान में भैरोसिंह शेखावत के निधन के बाद बीजेपी की कमान वसुंधरा राजे के हाथ में रही है। बीजेपी ने पिछले दो चुनाव वसुंधरा राजे के चेहरे को आगे करके ही जीते हैं। यह पहली बार है कि वसुंधरा राजे के पूरी तरह से साइड लाइन कर दिया गया है। वसुंधरा राजे के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जा रहा है। पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि नाराज़ और तिरस्कृत वसुंधरा राजे बीजेपी के कार्यक्रमों की अनदेखी भी नहीं कर पा रही है। जबकि वसुंधरा राजे के समर्थकों पर बीजेपी अनुशासन का डंडा चला रही है। दरअसल, सियासी जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे के धुर विरोधी कैंप ने जानबूझकर पीएम मोदी का नाम आगे किया है। पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने का माहौल बनाकार वसुंधरा राजे कैंप को हाशिए पर ला खड़ा किया है। सियासी जानकारों का यह भी कहना है कि यह सब सोची- समझी रणनीति के तहत हुआ है। वसुंधरा राजे विरोधी कैंप की रणनीति को भांप नहीं पाई। सियासी जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे की अनदेखी करना बीजेपी आलाकमान को भारी पड़ सकता है।

टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस-बीजेपी में फूट

राजस्थान में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों में फूट दिखाई दे रही है। कांग्रेस की तुलना में बीजेपी में फूट ज्यादा दिखाई दे रही है। क्योंकि बीजेपी आलाकमान ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली लिस्ट जारी कर दी है। लेकिन राजस्थान की सूची अटकी हुई है। माना जा रहा है कि जल्दी ही सूची आएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस में टिकट बंटवारे की धुरी सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट ही रहेंगे। दोनों ही नेताओं के कहने पर अधिकांश टिकटों का बंटवारा होगा। हालांकि, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा इस बात से इनकार करते हैं। रंधावा का कहना है कि जिताऊ और टिकाऊ को ही टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस में भी टिकटों को लेकर गुटबाजी कम नहीं है। सीएम गहलोत कह चुके हैं कि जिन लोगों ने उनकी सरकार को गिरने से बचाया है। उन्हें टिकट मिलना चाहिए। जबकि पायलट इसका विरोध कर सकते है। हालांकि, कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि इस बार सचिन पायलट बार-बार सरकार एकजुट होने की बात कह रहे हैं। सरकार वापसी का दावा कर रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि यह वहीं सचिन पायलट है, जिसने पिछले साढ़े चार साल में गहलोत सरकार को ढंग से काम नहीं करने दिया था।

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