श्रीडूंगरगढ़ के बीड़ के प्रति राज और काज संवेदनहीन, स्वार्थ की राजनीति कर रही बहुमूल्य धरोहर को छिन्न-भिन्न और खुर्द -बुर्द :- डॉ. चेतन स्वामी
The Khabar Xpress 08 सितंबर 2025। पहले के लोग गौधन और पर्यावरण के प्रति कितने संवेदनशील थे। हरेक गांव और शहर के बाहर गोचर भूमि छोड़ी जाती। लोग इतने निष्ठावान थे कि इस गोचर की भूमि से एक लकड़ी भी उठाना पाप समझते। प्रसिद्ध संत स्वामी रामसुखदासजी महाराज ने कहा था कि गोचर की भूमि पर कब्जा करनेवाले को सैकड़ों गायों की गोहत्या का पाप लगता है। श्रीडूंगरगढ में एक विशाल गोचर के रूप में बीड़ कायम किया गया। आओ, आपको श्रीडूंगरगढ के इस बीड़ के सम्बन्ध में कुछ बातें बताते हैं।