बंजर ज़मीन पे,बहार लाता है, अन्नदाता बन,भूख मिटाता है, हाँ जी साहेब, वो किसान कहलाता है.., आखिर कब तक ठगा जायेगा भूमिपुत्र, क्यों आज भी है उपेक्षित ?
बंजर ज़मीन पे,बहार लाता है,
अन्नदाता बन,भूख मिटाता है,
हाँ जी साहेब, वो किसान कहलाता है..,
आखिर कब तक ठगा जायेगा भूमिपुत्र,
क्यों आज भी है उपेक्षित ?