The Khabar Xpress 09 अक्टूबर 2026, श्रीडूंगरगढ़। पंचायती राज चुनावों की सरगर्मियों के बीच श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की नवगठित रीड़ी पंचायत समिति में प्रधान पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। रीड़ी पंचायत समिति का प्रधान पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। पंचायत समिति में कुल 17 वार्ड हैं और वार्डों का आरक्षण भी तय हो चुका है।
आरक्षण के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एससी आरक्षित प्रधान सीट पर राजनीतिक दल किस चेहरे को आगे बढ़ाते हैं ? इसी बीच युवा नेता राजेंद्र मेघवाल बापेऊ का नाम संभावित दावेदार के रूप में क्षेत्रीय राजनीतिक गलियारों में चर्चित हो रखा है।
आरक्षण ने खड़ा किया बड़ा राजनीतिक सवाल
रीड़ी की एससी आरक्षित प्रधान सीट को केवल एक चुनावी पद के तौर पर नहीं, बल्कि वंचित वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक चर्चा का एक अहम सवाल यह है—
“पंचायत समिति रीड़ी की अनुसूचित जाति आरक्षित प्रधान सीट पर वंचित वर्ग को मजबूत प्रतिनिधित्व मिलेगा या फिर किसी नए एवं गैर-राजनीतिक चेहरे को आगे कर वंचित वर्ग के राजनीतिक नेतृत्व से दूर रखने वाली पुरानी परिपाटी कायम रहेगी ?”
यह सवाल अब स्थानीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित राजनीतिक दलों और चुनाव के बाद बनने वाले पंचायत समिति सदस्यों के समीकरण पर निर्भर करेगा।
यहीं राजेंद्र मेघवाल बापेऊ की दावेदारी चर्चा में आती है।
राजेंद्र मेघवाल बापेऊ के चाहने वाले उन्हें युवा, शिक्षित और राजनीतिक अनुभव रखने वाला एससी वर्ग का चेहरा बताते हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ से बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और 6,379 वोट हासिल किए। वे 14 उम्मीदवारों के मुकाबले चौथे स्थान पर रहे।
विधानसभा चुनाव में मिला यह वोट आधार उनके लिए स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक तथ्य जरूर है। हालांकि विधानसभा और पंचायत समिति के चुनावों का सामाजिक एवं राजनीतिक गणित अलग होता है।
करीबी चुनावी मुकाबले से विधानसभा तक
बापेऊ की राजनीतिक यात्रा में 2020 का सरपंच चुनाव भी उल्लेखनीय पड़ाव रहा है। उनके समर्थकों के अनुसार सामान्य सीट से लड़े उस चुनाव में उन्हें महज 79 वोट से हार का सामना करना पड़ा था।
इसके बाद 2023 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मौजूदगी को बड़े स्तर पर दर्ज कराया।
कांग्रेस में बढ़ता कद

पिछड़े एवं वंचित वर्ग की आवाज़ को हर मंच पर उठाते उठाते युवा क्रांतिकारी नेता राजेन्द्र मेघवाल बापेऊ ने अपनी पहचान क्षेत्रीय स्तर से बढ़ाकर जिला एवं प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर बनाई है। क्षेत्र के युवा कांग्रेसी नेताओं के साथ समन्वय तो इनका बेहतर है ही, साथ ही जिले के देहात जिलाध्यक्ष बिशनाराम सिहाग हो या फिर शहर जिलाध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल, इनके संबंध बेहतरीन है।


राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली से इनकी नजदीकियां छुपी हुई नहीं है। जिलास्तरीय किसी भी कार्यक्रम में इनकी मंचीय उपस्थिति इनके बढ़ते हुए कद को विस्तार से दिखाती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सचिन पायलट की फेवरेट लिस्ट में बापेऊ कई शुमारी मानी जाती है।

शिक्षित युवा चेहरा
2023 के विधानसभा चुनावी हलफनामे के अनुसार राजेंद्र मेघवाल बापेऊ की शैक्षणिक योग्यता M.A. Political Science दर्ज है साथ ही उन्होंने कानून (LLB) की पढ़ाई भी कर रखी है। समाज सेवा के रूप में दलित वर्ग के हितों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया है।

अब फैसला केवल चेहरे से नहीं, समीकरण से होगा
रीड़ी में प्रधान पद की लड़ाई में सिर्फ यह महत्वपूर्ण नहीं होगा कि कौन उम्मीदवार राजनीतिक रूप से चर्चित है। महत्वपूर्ण यह भी होगा कि—
- किस दल का संगठन किस चेहरे के पीछे खड़ा होता है ?
- एससी वर्ग के मतदाताओं में किसकी स्वीकार्यता है ?
- पंचायत समिति सदस्यों के बीच किसकी राजनीतिक पकड़ बनती है ?
- वरिष्ठ नेतृत्व किस चेहरे पर भरोसा जताता है ?
- और सबसे महत्वपूर्ण—क्या आरक्षित सीट को मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर बनाया जाएगा ?
यही वे सवाल हैं जो रीड़ी की आगामी राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
राजेंद्र मेघवाल बापेऊ—दावेदारी या सिर्फ राजनीतिक चर्चा ?
फिलहाल बापेऊ को किसी दल द्वारा रीड़ी प्रधान पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है। इसलिए उनकी दावेदारी को अभी संभावित राजनीतिक दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लेकिन एससी आरक्षण + युवा चेहरा + 2020 का करीबी चुनावी अनुभव + 2023 विधानसभा चुनाव में 6,379 वोट—इन तथ्यों ने उनके नाम को राजनीतिक चर्चा में जरूर ला दिया है।
अब असली तस्वीर तब सामने आएगी जब राजनीतिक दल उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते खोलेंगे।
सबसे बड़ा सवाल
क्या रीड़ी की एससी आरक्षित प्रधान सीट वंचित वर्ग से आने वाले अनुभवी और सक्रिय युवा राजनीतिक चेहरे को नेतृत्व का अवसर देगी, या फिर कोई नया चेहरा सामने आएगा ?
रीड़ी में इस बार चुनाव सिर्फ प्रधान चुनने का नहीं, बल्कि आरक्षित सीट के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा तय करने का चुनाव भी बनता दिखाई दे रहा है।