The Khabar Xpress 21 सितम्बर 2026। राजनीति में सिर्फ संख्या मायने नहीं रखती, संख्या का इस्तेमाल कैसे किया जाता है, असली कहानी वहां से शुरू होती है। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव का नतीजा इसी राजनीतिक गणित की मिसाल बनकर सामने आया है।
40 सदस्यीय बोर्ड में कांग्रेस के 15, भाजपा के 13 पार्षद, विकास मंच के 9, निर्दलीय 2 और माकपा का 1 पार्षद निर्वाचित हुए थे, लेकिन अध्यक्ष चुनाव में कहानी पलट गई—भाजपा के नारायण कलाणी को 16, कांग्रेस के राधेश्याम सारस्वत को 15 और विकास मंच के जतनसिंह राजपुरोहित को 8 वोट मिले। माकपा ने मतदान ही नहीं किया।
यहीं से उठता है सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल
भाजपा के पास 13 पार्षद थे, लेकिन उसके प्रत्याशी को 16 वोट मिले।
यानी आंकड़ों की सीधी भाषा में भाजपा के घोषित पार्षदों से तीन वोट ज्यादा।
इन अतिरिक्त मतों का आधिकारिक स्रोत स्पष्ट है। इसलिए इसे किसी विशेष पार्षद की क्रॉस-वोटिंग मान लेना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि अध्यक्ष चुनाव ने पार्षदों की संख्या और सत्ता के अंतिम गणित के बीच का अंतर सामने ला दिया। कस्बे के नुक्कड़ों पर क्रॉस-वोटिंग की चर्चाओं का भी उल्लेख है।
ताराचंद सारस्वत: अब सवाल नेतृत्व का है
इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत की भूमिका स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है।
अध्यक्ष चुनाव से पहले भाजपा की गतिविधियों और मतदान की तैयारियों को लेकर श्रीडूंगरगढ़ के राजनीतिक गलियारों मे अलग अलग चर्चाएं थी लेकिन भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम रहा कि भाजपा ने बहुमत ना होने के बावजूद भी जीत हासिल की है। चुनाव परिणाम के बाद सारस्वत ने नवनिर्वाचित चेयरमैन नारायण कलाणी को बधाई देते हुए इसे जनादेश और भाजपा कार्यकर्ताओं की सांगठनिक विजय बताया।
इसे विधायक की व्यक्तिगत रणनीति का निर्णायक परिणाम कहना एक राजनीतिक व्याख्या होगी, जिसकी पूरी पुष्टि सार्वजनिक आंकड़ों से नहीं होती। लेकिन 13 पार्षदों के साथ 16 वोट तक पहुंचने की भाजपा की क्षमता ने सारस्वत के नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन को चर्चा का विषय जरूर बना दिया है।
कांग्रेस के लिए 15 का आंकड़ा क्यों भारी पड़ा?
कांग्रेस 15 सीटों के साथ बोर्ड में सबसे बड़ा दल बनी। भाजपा उससे दो सीट पीछे थी। फिर भी चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के खाते में गई।
यानी नगरपालिका की राजनीति में सबसे बड़ा दल होना अपने आप में अध्यक्ष पद की गारंटी नहीं है।
अध्यक्ष चुनाव ने यह भी दिखा दिया कि चुनाव परिणाम आने के बाद शुरू होने वाला राजनीतिक प्रबंधन कई बार मूल चुनावी गणित से अलग तस्वीर पैदा कर सकता है।
विकास मंच के 8 वोट भी कहानी का अहम अध्याय
विकास मंच के प्रत्याशी को 8 वोट मिलना भी इस चुनाव का महत्वपूर्ण आंकड़ा है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार मंच के पास 9 पार्षद थे। यानी उसके प्रत्याशी को अपने घोषित आंकड़े से एक वोट कम मिला।
फिलहाल तस्वीर साफ है-
कांग्रेस — 15 पार्षद
भाजपा — 13 पार्षद
अध्यक्ष चुनाव — भाजपा 16 वोट
नारायण कलाणी — निर्वाचित अध्यक्ष
जीत का अंतर — 1 वोट
श्रीडूंगरगढ़ में चुनाव का पहला अध्याय पार्षदों के परिणाम के साथ खत्म हुआ था, लेकिन दूसरा अध्याय चेयरमैन चुनाव ने लिखा है। 15 बनाम 13 के चुनावी गणित को 16 बनाम 15 के अध्यक्षीय परिणाम में बदलना अब स्थानीय राजनीति के अध्ययन का विषय रहेगा।
और इसी वजह से आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा चर्चा नारायण कलाणी की जीत से आगे बढ़कर भाजपा के राजनीतिक प्रबंधन और विधायक ताराचंद सारस्वत की भूमिका पर होना स्वाभाविक है।