The Khabar Xpress 31 जुलाई 2026, श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका चुनाव दस्तक दे चुके हैं। पांच साल तक सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन अब अचानक हर गली में राजनीति जाग उठी है। बयान आएंगे, मंच सजेंगे, आरोपों की बारिश होगी और जनता को फिर सपनों की सौगातें बांटी जाएंगी। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका का कार्यकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं, राजनीतिक दल जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं और विकास, भ्रष्टाचार तथा जनहित के मुद्दे फिर से चर्चा में हैं। लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा है—क्या पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका ईमानदारी से निभाई ?
लेकिन इस बार सवाल सत्ता से ही नहीं, विपक्ष से भी होगा।
- कांग्रेस से सीधा सवाल है—जब नगरपालिका में कथित भ्रष्टाचार की चर्चाएं हो रही थीं, कथित फर्जी एवं अवैध पट्टों को लेकर सवाल उठ रहे थे, विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उंगलियां उठ रही थीं, सफाई व्यवस्था दम तोड़ रही थी और जनता सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रही थी… तब आपका संघर्ष कहां था ?
- क्या एक भी ऐसा बड़ा जनआंदोलन हुआ जिसने पूरे श्रीडूंगरगढ़ को झकझोर दिया ? (ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए कस्बे के कुछ जागरूक युवाओ द्वारा जरूर 657 दिनों से उपखण्ड कार्यालय के आगे धरना दिया जा रहा है, जिसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।)
- क्या नगरपालिका के बाहर लगातार धरना हुआ ?
- क्या भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी गई ?
- क्या कथित फर्जी पट्टों के मामले में जनता के सामने दस्तावेज रखकर जवाबदेही तय कराने का अभियान चला ?
- अगर जवाब “नहीं” है, तो चुनाव के समय उठने वाली आवाजों पर जनता कैसे भरोसा करे ?
लोकतंत्र में विपक्ष केवल कुर्सी का दावेदार नहीं होता, बल्कि जनता का प्रहरी होता है। प्रहरी यदि पांच साल तक सोता रहे, तो चोर को दोष देने से पहले चौकीदार से भी सवाल पूछे जाते हैं। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका के नेता प्रतिपक्ष ने कभी भी आगे आकर किसी भी प्रकार का विरोध दर्ज नहीं करवाया और न ही कभी ऐसा लगा कि उनके नेतृत्व में विपक्ष जनता से जुड़ाव भी रखता है।
The Khabar Xpress किसी एक दल का बचाव नहीं कर रहा। सत्ता से भी उतने ही तीखे सवाल हैं। यदि नगरपालिका में भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कथित फर्जी एवं अवैध पट्टे जारी हुए हैं तो सच सामने आना चाहिए। यदि जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सत्ता पक्ष के विधायक ताराचंद सारस्वत ने नगरपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा तो जोरशोर से विधानसभा में उठाया था लेकिन वे स्वयं ही उस मुद्दे का फॉलोअप नही कर पाये। सत्ता के गलियारों में उनके द्वारा ही पोषित लोगो के भ्रष्टाचार की चर्चा आमजन में होती रही है। सत्ता पक्ष के पार्षदों द्वारा ही फ़र्ज़ी पट्टे बनाये गए जिस पर विधायक सारस्वत ने कोई कार्यवाही नहीं की। अपितु ये भ्रष्टाचारी उनके साथ ही विभिन्न आयोजनों के अभिन्न अंग रहे है। जीरो भ्रष्टाचार की बात करने वाले विधायक नगरपालिका में हुए भ्रष्टाचार को रोकने में भी जीरो ही साबित हुए है।
कहने वाले कहते है कि फ़र्ज़ी पट्टो की बात इसलिए नहीं हुई कि क्षेत्र के तीनों ही दलो के नेताओ ने जमकर के फ़र्ज़ी पट्टे बनवाये। वहाँ कोई पार्टीबाजी नहीं हुई बल्कि तीनो ही दल एक हो गए। ऐसा केवल श्रीडूंगरगढ़ में ही देखने को मिला है। इस मुद्दे पर तो श्रीडूंगरगढ़ विधायक भी रहस्यमय ढंग से चुप हो गए।
लेकिन विपक्ष की चुप्पी भी लोकतंत्र का एक बड़ा सवाल है।
जनता यह मानकर विपक्ष को चुनती है कि वह सत्ता की हर गलती पर आवाज उठाएगा। यदि विपक्ष भी पांच साल तक केवल दर्शक बना रहे और चुनाव आते ही क्रांतिकारी बनने लगे, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
इस बार श्रीडूंगरगढ़ की जनता को केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि “भाजपा ने क्या किया?” बल्कि यह भी पूछना चाहिए कि “कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए क्या किया ?”
लोकतंत्र में सत्ता की निष्क्रियता जितनी खतरनाक होती है, उतनी ही खतरनाक विपक्ष की खामोशी भी होती है। श्रीडूंगरगढ़ का विपक्ष गुटबाजी और अनेक खेमो में बंटा हुआ दिखाई देता है।
The Khabar Xpress का सीधा सवाल
यदि नगरपालिका में सब कुछ गलत हो रहा था, तो विपक्ष पांच साल तक चुप क्यों रहा ?
और यदि सब कुछ ठीक था, तो चुनाव आते ही इतने सवाल क्यों उठने लगे ?
जनता जवाब चाहती है।
इस बार वोट केवल वादों पर नहीं, पांच साल के काम और पांच साल की खामोशी—दोनों के हिसाब पर पड़ना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि जनता तीसरे विकल्प की ओर चली जाए।









